ब्लॉग खोजें

रांची में गूंजा मिथिला का सुर-संस्कार: विद्यापति स्मृति पर्व के दूसरे दिन हरमू मैदान बना सांस्कृतिक संगम



रांची, संवाददाता: 
झारखंड मैथिली मंच द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व के दूसरे दिन रांची का हरमू मैदान मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, लोकधुनों और साहित्यिक अभिव्यक्तियों से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम में लोकगीत, शास्त्रीय संगीत, गजल और पारंपरिक कला का ऐसा समागम देखने को मिला, जिसने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने किया। इस अवसर पर उन्होंने मैथिली भाषा और मिथिला संस्कृति के प्रति अपने गहरे जुड़ाव को व्यक्त करते हुए कहा कि “मैथिली केवल भाषा नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कार है।” उन्होंने यह भी बताया कि बिहार विधानसभा के सदस्य रहते हुए उन्हें मिथिला क्षेत्र को करीब से समझने का अवसर मिला।

उन्होंने मंच द्वारा उठाई गई मांग "मैथिली को भाषा अकादमी में शामिल करने तथा जेपीएससी और जेटेट परीक्षाओं में स्थान देने" पर सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि वे 15 अप्रैल को होने वाली झारखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। दीप्ति कुमारी द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय लोकगीत “दुमका में झुमका हरेलनी, काशी में कनवाली” ने माहौल को जीवंत कर दिया और दर्शक झूम उठे। वहीं डॉ. उज्जवल राय की मार्मिक गजल “सखी हे हमर दुखक नहीं ओर, रौ उगना तू कत गेले” ने लोगों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया।

संगीत के क्षेत्र में केडिया बंधुओं की युगलबंदी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मोरमुकुट केडिया, मनोज केडिया और मिथिलेश झा ने सितार, सरोद और तबले की संयुक्त प्रस्तुति में राग कीरबानी पेश कर शास्त्रीय संगीत का अद्भुत समां बांधा, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

हरमू मैदान में मिथिला की पारंपरिक कलाओं की झलक भी देखने को मिली। मिथिला पेंटिंग, सिक्की मौनी शिल्प और मैथिली पुस्तकों की प्रदर्शनी ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक गहराई प्रदान की और लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर दिया। साथ ही मिथिला का पारंपरिक व्यंजन माछ भात, चुरा मांछ आदि का लोगों ने आनंद लिया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वास्थ्य विभाग, झारखंड सरकार के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा उपस्थित रहे। इसके अलावा झारखंड मैथिली मंच के संरक्षक एवं पूर्व पार्षद अरुण कुमार झा, अध्यक्ष विनय कुमार झा, महासचिव जयंत झा, कोषाध्यक्ष संतोष मिश्र, उपाध्यक्ष बाबूलाल झा और भारतेंदु झा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इस अवसर पर मैथिली मंच की स्मारिका का भी विमोचन किया गया, जिसमें साहित्य, कविता और आलोचना के उत्कृष्ट लेखों का संकलन शामिल है। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन राम सेवक ठाकुर ने किया, जिनके हास्य-व्यंग्य और मंच संचालन शैली ने दर्शकों को लगातार बांधे रखा।

समग्र रूप से विद्यापति स्मृति पर्व का यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक उत्सव बना, बल्कि मैथिली भाषा और मिथिला की समृद्ध परंपरा को सहेजने और आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में उभरा।

रांची में गूंजा मिथिला का सुर-संस्कार: विद्यापति स्मृति पर्व के दूसरे दिन हरमू मैदान बना सांस्कृतिक संगम रांची में गूंजा मिथिला का सुर-संस्कार: विद्यापति स्मृति पर्व के दूसरे दिन हरमू मैदान बना सांस्कृतिक संगम Reviewed by PSA Live News on 12:19:00 am Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.