एससी-एसटी एक्ट के आरोपी अधिकारी ने फरारी में ली पदोन्नति, कोर्ट ने फिर जारी किया गिरफ्तारी वारंट
सुकेंद्र मिश्रा | मुरैना
मध्यप्रदेश पुलिस जहां अपराधियों पर सख्ती के दावे करती है, वहीं मुरैना जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एससी-एसटी एक्ट के एक मामले में आरोपी टीआई पुष्पक शर्मा पिछले करीब डेढ़ साल से फरार बताए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वे लगातार नौकरी करते रहे और विभागीय पदोन्नति भी हासिल कर ली।
विशेष न्यायालय मुरैना ने 18 सितंबर 2024 को आरोपी टीआई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए सिंहौनिया थाना पुलिस को 7 दिसंबर 2024 तक उन्हें न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार अब तक अदालत आरोपी के खिलाफ 15 गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुकी है, लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
हाल ही में 5 मई 2026 को मामले की सुनवाई हुई थी। इस दौरान भी आरोपी को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद न्यायालय ने एक बार फिर गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए आरोपी टीआई को 7 जुलाई 2026 को पेश करने के आदेश दिए हैं।
फरारी में नौकरी और प्रमोशन
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि फरारी के दौरान भी आरोपी अधिकारी विभागीय कार्यों में सक्रिय रहे। जानकारी के मुताबिक पुष्पक शर्मा वर्ष 2023 से 2025 तक छतरपुर जिले के बमीठा और हरपालपुर थानों में पदस्थ रहे। इसी दौरान उन्होंने एसआई से निरीक्षक पद तक पदोन्नति भी प्राप्त कर ली।
बताया जा रहा है कि फरारी के दौरान आरोपी अधिकारी विभागीय बैठकों में शामिल होते रहे और पुलिस प्रशासनिक गतिविधियों का हिस्सा बने रहे। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि जिस अधिकारी के खिलाफ अदालत से लगातार गिरफ्तारी वारंट जारी हो रहे थे, वह नियमित सेवा में कैसे बना रहा।
यह है पूरा मामला
मामला 7 अक्टूबर 2019 का है। अंबाह क्षेत्र के रुअरिया गांव निवासी रामशंकर जाटव के साथ गांव के तीन युवकों ने कथित रूप से मारपीट की थी। पीड़ित जब शिकायत लेकर सिंहौनिया थाने पहुंचा तो आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी एसआई पुष्पक शर्मा ने उसकी रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उल्टा उसी पर मामला दर्ज कर लिया।
पीड़ित का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने के बाद पुलिस ने उसे घर से बुलाकर थाने में मारपीट की और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया।
न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित ने न्यायालय में परिवाद दायर किया। सुनवाई के बाद 25 जून 2022 को विशेष न्यायालय ने पुष्पक शर्मा सहित चार लोगों के खिलाफ मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। अन्य आरोपी न्यायालय में पेश हो गए, लेकिन पुष्पक शर्मा लगातार गैरहाजिर रहे, जिसके बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए।
पीड़ित बोला- “मैं दलित हूं, इसलिए न्याय नहीं मिल रहा”
पीड़ित रामशंकर जाटव ने बताया कि वह साइंस से स्नातक हैं और पीएससी की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में मारपीट के बाद जब वे रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे तो पुलिस ने उनकी शिकायत सुनने के बजाय उन्हीं पर कार्रवाई कर दी।
रामशंकर के अनुसार, सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने के बाद उन्हें थाने बुलाकर प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि वह यह लड़ाई इसलिए लड़ रहे हैं ताकि भविष्य में किसी दलित के साथ थाने में ऐसा व्यवहार न हो। उनका आरोप है कि आरोपी पुलिस अधिकारी होने के कारण आज तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
आरोपी टीआई ने कहा- “मुझे वारंट की जानकारी नहीं”
आरोपी टीआई पुष्पक शर्मा से मोबाइल पर संपर्क करने पर उन्होंने दावा किया कि मुरैना के किसी न्यायालय में उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है और उन्हें गिरफ्तारी वारंट की जानकारी भी नहीं है।
हालांकि जानकारी के अनुसार उन्होंने 4 सितंबर 2025 को अपने वकील के माध्यम से ग्वालियर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि उन्हें वारंट की जानकारी नहीं थी तो अग्रिम जमानत के लिए आवेदन क्यों किया गया।
थाना प्रभारी बोले- “जानकारी नहीं है”
सिंहौनिया थाना प्रभारी अतुल सिंह परिहार ने कहा कि उन्होंने लगभग दो माह पूर्व ही पदभार ग्रहण किया है और फिलहाल उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं छतरपुर पुलिस मुख्यालय की आरआई पूर्णिमा मिश्रा ने बताया कि पुष्पक शर्मा 2023 से 2025 तक जिले के बमीठा और हरपालपुर थानों में पदस्थ रहे हैं। वर्तमान में उनका तबादला पुलिस मुख्यालय भोपाल हो चुका है।
उठ रहे कई सवाल
पूरे मामले ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत लगातार गिरफ्तारी वारंट जारी कर रही है, लेकिन आरोपी अधिकारी अब तक गिरफ्त से बाहर है। वहीं फरारी के दौरान उसका नौकरी करना और पदोन्नति प्राप्त करना भी विभागीय जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
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