रांची से विशेष रिपोर्ट | PSA Live News
झारखंड की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भा.कृ.अनु.प.–भारतीय कृषि जैवप्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी), रांची द्वारा “मेरा गांव मेरा गौरव (एमजीएमजी) कार्यक्रम 2026” के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान खासतौर पर धान आधारित एकल फसल प्रणाली, मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी और मृदा कार्बन के लगातार घटते स्तर जैसी गंभीर चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में कृषि उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
इस अभियान की खासियत यह है कि इसमें मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरीकरण और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) को केंद्र में रखा गया है। वैज्ञानिकों ने किसानों को समझाया कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उत्पादन की स्थिरता को भी प्रभावित करती है। इसके समाधान के रूप में रासायनिक, जैविक और कार्बनिक स्रोतों के संतुलित एवं समन्वित उपयोग पर जोर दिया गया, जिससे नाइट्रोजन के अत्यधिक उपयोग को कम किया जा सके और मृदा की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।
कार्यक्रम के दौरान एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) को अपनाने पर विशेष बल दिया गया। किसानों को फसल विविधीकरण, दलहनी फसलों के समावेश, कम्पोस्टिंग, मल्चिंग और जैविक अवशेषों के पुनर्चक्रण जैसे उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सटीक कृषि (Precision Farming) और नैनो उर्वरकों के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया, ताकि कृषि में दक्षता बढ़े और लागत में कमी आए।
अभियान के अंतर्गत किसानों को मृदा परीक्षण किट के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि खेत से सही तरीके से मिट्टी का नमूना कैसे लिया जाता है, परीक्षण कैसे किया जाता है और उसके आधार पर संतुलित उर्वरीकरण कैसे तय किया जाता है। इस प्रशिक्षण ने किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस व्यापक अभियान में 300 से अधिक किसानों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का संचालन आईआईएबी, रांची के वैज्ञानिकों की पांच विशेष टीमों द्वारा किया गया, जिनमें विभिन्न कृषि विषयों के विशेषज्ञ शामिल थे। इन टीमों ने गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें उनकी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान सुझाए।
कार्यक्रम के दौरान रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभावों पर भी गंभीर चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, मृदा कार्बन की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन और दीर्घकालीन उत्पादकता में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा, इससे जल प्रदूषण, पर्यावरणीय असंतुलन और मानव एवं पशु स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अभियान के तहत वर्मी कम्पोस्टिंग, अजोला उत्पादन और बतख की खाद के उपयोग जैसे व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किए गए। इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को यह बताया गया कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके किस प्रकार कम लागत में प्रभावी पोषक तत्व प्रबंधन किया जा सकता है। साथ ही ढैंचा और टेफ्रोसिया जैसी हरी खाद फसलों के महत्व पर भी जोर दिया गया, जो मृदा उर्वरता बढ़ाने और नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होती हैं।
इसके अतिरिक्त, गोबर, मुर्गी खाद और बकरी खाद जैसे पशु अपशिष्टों के पोषक महत्व और उनके वैज्ञानिक उपयोग के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों को यह समझाया गया कि हरी खाद और जैविक पदार्थों का उपयोग मृदा कार्बन को बढ़ाने और मिट्टी की संरचना को सुधारने में अत्यंत सहायक होता है।
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू दलहनी फसलों को बढ़ावा देना भी रहा। किसानों को बताया गया कि दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करती हैं। काउपी, चना, मसूर, मूंग और अरहर जैसी फसलों के सफल मॉडल प्रस्तुत किए गए, जिससे किसानों को प्रेरणा मिल सके। साथ ही, अंतरवर्ती खेती (Intercropping) और फसल चक्र (Crop Rotation) के आधुनिक तरीकों की भी जानकारी दी गई।
समग्र रूप से, “मेरा गांव मेरा गौरव 2026” अभियान केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि कृषि को वैज्ञानिक, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में उभर रहा है। यह पहल न केवल मृदा स्वास्थ्य सुधारने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
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3:54:00 pm
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