दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में 933वें खिचड़ी भंडारे का भव्य आयोजन, 1567 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
रांची। अन्नदान को भारतीय संस्कृति में सर्वोच्च दान माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि अन्न ही ऐसा तत्व है जो जीव मात्र की तत्काल तृप्ति करता है, शरीर को बल, मन को संतोष तथा बुद्धि को पोषण प्रदान करता है। इसी सनातन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रांची स्थित दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में शनिवार, 30 मई को 933वें खिचड़ी भंडारे का भव्य एवं श्रद्धापूर्ण आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और भक्ति, सेवा तथा समर्पण का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। आयोजित खिचड़ी महाप्रसाद भंडारे में कुल 1567 श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी और दोपहर तक भंडारे में शामिल होने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं।
मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार सनातन धर्म में अन्नदान को महादान की संज्ञा दी गई है। धर्मग्रंथों में वर्णित है कि अन्न से न केवल मनुष्य बल्कि देवता, असुर, यक्ष, किन्नर, नाग, पितर, गंधर्व, पशु-पक्षी तथा समस्त जीव-जगत तृप्त होता है। पितरों के निमित्त किए जाने वाले पिंडदान, देवताओं को समर्पित आहुति एवं अर्घ्य, गोबलि तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी अन्न का विशेष महत्व है। भूखे और प्यासे व्यक्ति की वास्तविक तृप्ति अन्न और जल से ही संभव है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में अन्न के संरक्षण, संवर्धन तथा उसके सदुपयोग पर विशेष बल दिया गया है।
भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं को श्रद्धापूर्वक खिचड़ी महाप्रसाद परोसा गया। उपस्थित भक्तों ने मंदिर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सेवा, सहयोग और समरसता की भावना को मजबूत करते हैं। मंदिर में नियमित रूप से आयोजित होने वाला यह खिचड़ी भंडारा अब एक धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा का स्वरूप ग्रहण कर चुका है, जिसमें विभिन्न वर्गों के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
इस बार खिचड़ी महाप्रसाद का निवेदन श्री अजित कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती बबिता कुमारी, श्री अमिताभ खेतान एवं श्री संदीप खेतान (रांची निवासी) तथा श्री महेश्वर रेड्डी (तेलंगाना) की ओर से श्रद्धापूर्वक किया गया। दानदाताओं ने इसे ईश्वर की कृपा और समाज सेवा का माध्यम बताते हुए कहा कि अन्नदान से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है।
मंदिर के पुजारियों एवं सेवादारों ने बताया कि खिचड़ी भंडारे का मुख्य उद्देश्य समाज में सेवा, करुणा, सद्भाव और अन्नदान की संस्कृति को बढ़ावा देना है। वर्षों से निरंतर चल रही यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त कर रही है, बल्कि जरूरतमंदों एवं श्रद्धालुओं को एक मंच पर जोड़कर सामाजिक एकता का भी संदेश दे रही है।
भक्ति, सेवा और अन्नदान की भावना से ओतप्रोत इस 933वें खिचड़ी भंडारे ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सनातन संस्कृति में अन्न केवल भोजन नहीं, बल्कि लोककल्याण, मानवता और ईश्वर भक्ति का सशक्त माध्यम है। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर से सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना करते हुए महाप्रसाद ग्रहण किया तथा आयोजन की सफलता के लिए मंदिर प्रबंधन और सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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9:30:00 pm
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