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मदर्स डे पर मातृशक्ति के सम्मान में आयोजित हुआ आध्यात्मिक कार्यक्रम, वक्ताओं ने बताया— “माँ ही समाज और संस्कारों की पहली पाठशाला”


राँची। 
प्रजापिता प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र, चौधरी बगान हरमू रोड राँची में “मदर्स डे” के अवसर पर एक विशेष आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं, चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और मातृत्व की महत्ता, संस्कारों की शक्ति तथा समाज निर्माण में माँ की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभ्रा मजूमदार ने कहा कि माँ बच्चे की प्रथम गुरु, शिक्षक और जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे के व्यक्तित्व, चरित्र और संस्कारों का निर्माण उसकी माँ से ही प्रारंभ होता है। माँ अपने भीतर त्याग, शांति, सहनशीलता, प्रेम और वात्सल्य जैसे दिव्य गुणों का भंडार समेटे रहती है। वह स्वयं के बारे में कम और अपने परिवार तथा बच्चों के भविष्य के बारे में अधिक सोचती है। उन्होंने कहा कि माँ का सम्पूर्ण जीवन दूसरों के सुख और कल्याण के लिए समर्पित होता है।

कार्यक्रम में उपस्थित रुबी रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि माता केवल एक परिवार की संरक्षक नहीं बल्कि पूरे विश्व की निर्माता होती है। उन्होंने कहा कि माँ का हृदय करुणा और वात्सल्य से परिपूर्ण होता है तथा वह कभी किसी को दुखी नहीं देख सकती। माता केवल संतान को जन्म ही नहीं देती, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर उसका मार्गदर्शन और संरक्षण भी करती है।

डॉ. सुषमा ने कहा कि यदि आज की माताएँ स्वयं को केवल अपने घर तक सीमित न रखकर समाज, राष्ट्र और विश्व की माता के रूप में देखें तथा अपने प्रेम, दया और वात्सल्य को व्यापक स्तर पर फैलाएँ, तो वे पूरे विश्व में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव निराकार सम्पूर्ण विश्व की माँ के समान हैं, जो राजयोग और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मानव जीवन को श्रेष्ठ गुणों से भरने का कार्य कर रहे हैं।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका ने कहा कि परमात्मा शिव इस सम्पूर्ण सृष्टि के सर्वोच्च पालनकर्ता हैं, जिन्होंने इस सुंदर संसार की रचना की और आत्माओं को जीवन रूपी रंगमंच पर अपनी भूमिका निभाने के लिए भेजा। उन्होंने कहा कि संसार की प्रत्येक माँ शिव परमात्मा की ही ममतामयी शक्ति का स्वरूप है, जो अपने वात्सल्य और दिव्य गुणों से संतानों का पालन-पोषण करती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि भारत मातृप्रधान संस्कृति वाला देश है, इसलिए यहाँ “वंदे मातरम्” का उद्घोष किया जाता है। उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि सृष्टि के रचयिता शिव परमात्मा ब्रह्मा मुख द्वारा देवी-देवताओं की रचना करते हैं, इसलिए आध्यात्मिक भाषा में ब्रह्मा को माँ भी कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव सहज राजयोग एवं ईश्वरीय ज्ञान के माध्यम से वर्तमान दुख, अशांति और पतन से भरी दुनिया को पुनः पवित्र, श्रेष्ठ और सुखमय संसार में परिवर्तित करने का कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान मातृशक्ति के सम्मान में विशेष आध्यात्मिक संदेश, गीत-संगीत एवं प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए गए। उपस्थित लोगों ने मातृत्व, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। समारोह का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव से ओतप्रोत रहा।

मदर्स डे पर मातृशक्ति के सम्मान में आयोजित हुआ आध्यात्मिक कार्यक्रम, वक्ताओं ने बताया— “माँ ही समाज और संस्कारों की पहली पाठशाला” मदर्स डे पर मातृशक्ति के सम्मान में आयोजित हुआ आध्यात्मिक कार्यक्रम, वक्ताओं ने बताया— “माँ ही समाज और संस्कारों की पहली पाठशाला” Reviewed by PSA Live News on 4:37:00 pm Rating: 5

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