अनधिकृत अनुपस्थिति, गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के आरोप हुए साबित, जिलाधिकारी ने दिया सख्त संदेश
मधुबनी। सरकारी सेवाओं में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बेनीपट्टी प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित (निलंबित) लिपिक दिनेश कुमार झा को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने विभागीय जांच में आरोपों के पूरी तरह प्रमाणित पाए जाने के बाद बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत यह कठोर दंडादेश जारी किया।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार संबंधित लिपिक पर लगातार बिना अनुमति कार्यालय से अनुपस्थित रहने, न्यायालय संबंधी महत्वपूर्ण अभिलेखों के रख-रखाव में गंभीर लापरवाही बरतने, संवेदनशील एवं गोपनीय सूचनाओं को अनधिकृत व्यक्तियों तक पहुंचाने तथा कार्यालयीन अनुशासन और गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। विभागीय जांच के दौरान इन आरोपों की विस्तृत पड़ताल की गई, जिसमें उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और विभागीय अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए।
जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित कर्मी को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने के पर्याप्त अवसर भी प्रदान किए गए, लेकिन वह संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला पदाधिकारी ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया।
पहले भी हो चुकी थी कई विभागीय कार्रवाइयां
जांच रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि दिनेश कुमार झा के विरुद्ध पूर्व में भी कई विभागीय कार्यवाहियां संचालित की जा चुकी थीं। विभिन्न मामलों में उन पर दंड भी अधिरोपित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उनके कार्य व्यवहार और प्रशासनिक आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया। लगातार मिल रही शिकायतों और दोहराई जा रही अनियमितताओं को देखते हुए प्रशासन ने इस बार कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।
जिलाधिकारी का स्पष्ट संदेश
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने कहा कि सरकारी सेवक जनता और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में उनसे उच्च स्तर की जवाबदेही, ईमानदारी, अनुशासन और नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी दायित्वों की अनदेखी, कार्यालयीन गोपनीयता का उल्लंघन, अभिलेखों के साथ लापरवाही तथा स्वेच्छाचारिता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की "शून्य सहिष्णुता नीति" के तहत ऐसे मामलों में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी और सेवा नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकारी कर्मियों में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
जिलाधिकारी की इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासनिक महकमे और सरकारी कर्मचारियों के बीच व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति सुधारने और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, अनुशासनहीनता और गोपनीयता भंग करने जैसी गतिविधियों पर प्रशासन की पैनी नजर है और दोषी पाए जाने पर कठोर दंड से बचना संभव नहीं होगा।
अनुशासनहीनता पर प्रशासन का सख्त रुख
हाल के वर्षों में सरकारी कार्यालयों में समयबद्ध कार्य निष्पादन, अभिलेखों के डिजिटलीकरण और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यह कार्रवाई प्रशासन की उसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत जनहित से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन का मानना है कि कठोर कार्रवाई से अन्य कर्मियों में भी जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना मजबूत होगी तथा सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
Reviewed by PSA Live News
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7:34:00 am
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