वार्ड 21 में सूखा-गीला कचरा योजना पर उठे सवाल, पार्षद और सामाजिक कार्यकर्ता आमने-सामने
अररिया, विशेष संवाददाता।अररिया नगर परिषद के वार्ड संख्या 21 स्थित चित्रगुप्त नगर में सूखा एवं गीला कचरा प्रबंधन योजना के तहत बाल्टी वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। योजना में कथित घोटाले और अनियमितता के आरोपों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं वार्ड संख्या 21 के नगर पार्षद प्रत्याशी संजीत कुमार ने आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों से घर-घर दो-दो कचरा बाल्टी वितरण की योजना केवल कागजों में संचालित की जा रही थी, जबकि धरातल पर अधिकांश लोगों को इसका लाभ नहीं मिला।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब रविवार 17 मई को बाहरी जांच टीम के वार्ड में पहुंचने की सूचना मिलते ही अचानक बाल्टी वितरण का कार्य शुरू कर दिया गया। आरोप है कि सुबह-सुबह नगर पार्षद रीना देवी के पति विजय जैन द्वारा चुनिंदा घरों में जल्दबाजी में छोटी साइज की बाल्टियां बांटी गईं, ताकि जांच टीम के सामने योजना को सफल दिखाया जा सके और कथित गड़बड़ियों पर पर्दा डाला जा सके।
“जांच से पहले शुरू हुआ वितरण, यह संयोग नहीं”
संजीत कुमार ने कहा कि वार्ड के लोगों को वर्षों से बताया जाता रहा कि नगर परिषद की ओर से प्रत्येक घर को सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने के लिए दो-दो बाल्टियां उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि बड़ी संख्या में परिवारों को अब तक कोई बाल्टी नहीं मिली थी। उन्होंने दावा किया कि रविवार से पहले चित्रगुप्त नगर के अधिकांश घरों में योजना के तहत एक भी बाल्टी नहीं बांटी गई थी।
उनका आरोप है कि जैसे ही जांच टीम के वार्ड में आने की सूचना मिली, सुबह करीब सात बजे के बाद आनन-फानन में कुछ घरों में बाल्टी पहुंचाई जाने लगी। हालांकि कई मुख्य सड़कों और मोहल्लों के घरों को इससे वंचित रखा गया। संजीत कुमार ने कहा कि यदि योजना वर्षों से सही तरीके से चल रही थी, तो फिर जांच के दिन ही अचानक वितरण क्यों शुरू किया गया।
“लोग जांच टीम को सच बताएं”
सामाजिक कार्यकर्ता ने वार्ड की जनता से अपील करते हुए कहा कि वे जांच टीम के सामने वास्तविक स्थिति रखें और बताएं कि उन्हें पहले कभी योजना का लाभ मिला या नहीं। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो हर साल होने वाले कथित घोटाले और कागजी वितरण का सच सामने आ जाएगा।
उन्होंने मांग की कि जांच टीम केवल कागजी रिकॉर्ड देखने तक सीमित न रहे, बल्कि वार्ड के प्रत्येक घर में जाकर लाभार्थियों से सीधे जानकारी ले। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि नगर परिषद द्वारा दिखाई जा रही वितरण सूची और वास्तविकता में कितना अंतर है।
जांच टीम पहुंचने से पहले बंटी बाल्टियां
संजीत कुमार ने बताया कि जांच टीम सुबह लगभग 10 से 11 बजे के बीच वार्ड में जांच के लिए पहुंची थी। लेकिन उससे पहले ही कुछ स्थानों पर तेजी से बाल्टी बांटने का कार्य शुरू कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई जांच को प्रभावित करने और नगर परिषद की छवि बचाने के उद्देश्य से की गई।
उन्होंने कहा कि यदि योजना पारदर्शी होती तो वितरण कार्य नियमित रूप से होता और लोगों को वर्षों इंतजार नहीं करना पड़ता। अब जबकि जांच शुरू हुई है, तब जल्दबाजी में बाल्टी बांटना कई सवालों को जन्म देता है।
पार्षद रीना देवी ने आरोपों को बताया निराधार
मामले में वार्ड पार्षद रीना देवी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनकी जानकारी के बिल्कुल विपरीत है और राजनीतिक उद्देश्य से उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
रीना देवी ने कहा कि यदि किसी को कोई शिकायत है तो उसे सीधे नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि पहले बाल्टी वितरण नहीं हुआ था, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई।
पार्षद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए तो वे मानहानि का मुकदमा दायर करेंगी। उनका कहना है कि बिना प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं है और इससे उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
नगर परिषद की चुप्पी से बढ़े सवाल
मामले में अररिया नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी चंद्र प्रकाश राज से संपर्क कर पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। नगर परिषद की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण लोगों के बीच संदेह और गहरा गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि योजना में सबकुछ पारदर्शी था, तो प्रशासन को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं कई लोगों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
योजना की पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न
सूखा एवं गीला कचरा प्रबंधन योजना स्वच्छता अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इसका उद्देश्य घरों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग एकत्र कर पर्यावरण संरक्षण और साफ-सफाई सुनिश्चित करना है। लेकिन यदि योजना के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हुई है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बन सकता है।
अब सबकी निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो यह मामला नगर परिषद प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।
Reviewed by PSA Live News
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9:23:00 pm
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