हार के बाद Mamata Banerjee की पार्टी में बढ़ी अंदरूनी बगावत, कई नेताओं ने उठाए नेतृत्व पर सवाल
“जनता ने जो फैसला दिया, वह पार्टी के लिए चेतावनी है” — पूर्व मंत्री का बड़ा बयान
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। हालिया चुनावी झटकों और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच सत्तारूढ़ Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress यानी टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों ने अब नेतृत्व की कार्यशैली, संगठन की दिशा और जनता से बढ़ती दूरी पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि हालिया हार के बाद पार्टी के भीतर “आत्ममंथन” की मांग अब “विद्रोह” का रूप लेती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक एक दर्जन से अधिक नेताओं ने बंद कमरे की बैठकों में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इनमें कुछ पूर्व मंत्री, पुराने संगठनात्मक चेहरे और कई जिलों के प्रभावशाली नेता शामिल बताए जा रहे हैं।
पूर्व खेल मंत्री का बड़ा हमला
टीएमसी के एक पूर्व खेल मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बड़ा बयान देते हुए कहा कि “जनता ने जो फैसला दिया, वह गलत नहीं है। पार्टी को अब जमीन की हकीकत समझनी होगी। अगर जनता नाराज है तो उसकी वजह भी हमें ही तलाशनी होगी।”
उन्होंने इशारों-इशारों में पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि संगठन में अब पुराने कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही और फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित होकर रह गए हैं।
उनके बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी इस मौके को हाथोंहाथ लेते हुए टीएमसी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
पार्टी के अंदर क्यों बढ़ रही नाराजगी?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो टीएमसी के भीतर असंतोष की कई वजहें सामने आ रही हैं—
- चुनावी रणनीति को लेकर असहमति
- स्थानीय नेताओं की अनदेखी
- भ्रष्टाचार के आरोपों से पार्टी की छवि को नुकसान
- युवाओं और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी
- संगठन में कथित गुटबाजी
- केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से बढ़ा दबाव
बताया जा रहा है कि कई जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरा है। कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी अब “जन आंदोलन” वाली छवि से दूर होती जा रही है और इसका सीधा असर चुनावी परिणामों में दिखाई दे रहा है।
भाजपा और विपक्ष ने साधा निशाना
विपक्षी दलों ने टीएमसी में बढ़ती खींचतान को “अंत की शुरुआत” करार दिया है। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और टीएमसी के अपने नेता भी यह समझ चुके हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व जल्द ही नाराज नेताओं को साधने में सफल नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
क्या टीएमसी में होगा बड़ा बदलाव?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Mamata Banerjee पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष को संभाल पाएंगी या आने वाले दिनों में टीएमसी में और बड़े चेहरे खुलकर सामने आएंगे?
सूत्रों के अनुसार पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव, नई रणनीति और कुछ बड़े चेहरों की जिम्मेदारियों में फेरबदल पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से किसी बड़े संकट से इनकार किया जा रहा है।
लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि बंगाल की राजनीति अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां टीएमसी को सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि अपने ही नेताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।
Reviewed by PSA Live News
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10:00:00 pm
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