एचडीसीए विवाद के बाद सांसद-विधायक की संयुक्त पीसी, बोले – “सब भला-चंगा है”, मगर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
हजारीबाग। हजारीबाग की राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रहा भाजपा का अंदरूनी घमासान फिलहाल शांत होता दिखाई दे रहा है। हजारीबाग डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट ए
सोसिएशन (एचडीसीए) के निमंत्रण और मैत्री मैच को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सार्वजनिक बयानबाजी, तंज, महाभारत और रामायण के उदाहरणों तक पहुंचने के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता के जरिए थमता नजर आया। हालांकि राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि ऊपर से सबकुछ सामान्य दिखाने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन भीतर की तल्खी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
दरअसल पूरा विवाद एचडीसीए के एक कार्यक्रम में विधायक प्रदीप प्रसाद को कथित तौर पर नजरअंदाज किए जाने से शुरू हुआ था। विधायक ने इसे अपनी राजनीतिक उपेक्षा बताते हुए न सिर्फ एसोसिएशन बल्कि उसके चेयरमैन और हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। मामला तब और गरमा गया जब दोनों नेताओं के बीच मीडिया के सामने बयानबाजी शुरू हो गई।
“यदि लक्ष्मण उदंड हो जाए तो राम क्या कर सकते हैं...”
विवाद के दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने प्रेस वार्ता कर सफाई दी थी। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि “यदि लक्ष्मण उदंड हो जाए तो राम क्या कर सकते हैं? मैं वह राम नहीं हूँ जो उदंडता बर्दाश्त करूँ।” सांसद का यह बयान आते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। भाजपा के भीतर ही इसे खुली चुनौती और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जाने लगा।
सांसद के इस बयान का जवाब देते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने भी महाभारत का उदाहरण देते हुए “हस्तिनापुर लूटने” और “धृतराष्ट्र” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। विधायक के इस पलटवार ने विवाद को और हवा दे दी। दोनों नेताओं की बयानबाजी अगले ही दिन अखबारों, सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों की बड़ी सुर्खी बन गई।
भाजपा जिलाध्यक्ष की पहल पर हुई सुलह की कोशिश
मामला जब लगातार तूल पकड़ने लगा और भाजपा संगठन की छवि पर असर पड़ने लगा, तब पार्टी के जिला नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा। भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद सिंह की पहल पर मंगलवार को फ्लोरिस्टा बैंक्वेट हॉल में संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें सांसद मनीष जायसवाल और विधायक प्रदीप प्रसाद दोनों एक साथ मंच पर नजर आए।
इस संयुक्त प्रेस वार्ता का मकसद साफ था— पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच यह संदेश देना कि भाजपा में सबकुछ सामान्य है और नेताओं के बीच कोई बड़ा विवाद नहीं है।
“कॉकरोच” वाला उदाहरण फिर बना चर्चा का विषय
संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने विवाद पर सफाई देते हुए एक नया उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि “यदि गलती से खाने में कॉकरोच गिर जाए तो उसे निकाल दिया जाता है, लेकिन अगर कोई जानबूझकर खाने में कॉकरोच डाल दे और उसे खाने के लिए कहे तो कैसे खाया जाएगा?”
सांसद का यह बयान सुनते ही प्रेस वार्ता में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आजकल सोशल मीडिया और राजनीति में “कॉकरोच” शब्द ट्रेंड में है और सांसद ने उसी ट्रेंड को पकड़ते हुए जवाब देने की कोशिश की।
हालांकि विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इस बयान को भाजपा के अंदर चल रही गुटबाजी का प्रतीक बताया। कई लोगों का मानना है कि जिस तरह से बयान दिए जा रहे हैं, वह केवल सामान्य मतभेद नहीं बल्कि अंदरूनी शक्ति संघर्ष का संकेत हैं।
विधायक बोले – “बीच के लोगों ने भ्रम फैलाया”
वहीं विधायक प्रदीप प्रसाद ने प्रेस वार्ता में नरम रुख अपनाते हुए कहा कि “बीच के लोगों ने भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी थी। अब बैठकर समाधान निकाल लिया गया है। मामले को आवश्यकता से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया।”
विधायक ने यह भी कहा कि “हस्तिनापुर को बचा लिया गया है।”
उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। क्योंकि कुछ दिन पहले तक जो नेता खुलकर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे थे, वही अब मंच साझा कर सौहार्द्र का संदेश देते दिखाई दिए।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर ये “बीच के लोग” कौन हैं? क्या भाजपा के अंदर कोई ऐसा गुट सक्रिय है जो दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ाने का काम कर रहा था? या फिर यह पूरा विवाद केवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा था? इन सवालों पर फिलहाल भाजपा नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है।
भाजपा संगठन ने ली राहत की सांस
भाजपा के लिए यह विवाद इसलिए भी असहज था क्योंकि दोनों नेता पार्टी के मजबूत चेहरे माने जाते हैं। हजारीबाग में सांसद मनीष जायसवाल का अपना प्रभाव है, वहीं विधायक प्रदीप प्रसाद भी संगठन और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की सार्वजनिक लड़ाई पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही थी।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि यह विवाद और बढ़ता तो इसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता था। यही वजह रही कि संगठन को सक्रिय होकर बीच-बचाव करना पड़ा।
क्या सचमुच खत्म हो गया विवाद?
हालांकि संयुक्त प्रेस वार्ता के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहत जरूर महसूस की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा अब भी जारी है कि यह सुलह केवल “ऊपरी समझौता” है। मंच पर मुस्कुराहट जरूर दिखाई दी, लेकिन बयानबाजी की तल्खी इतनी जल्दी खत्म होना आसान नहीं माना जा रहा।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेताओं के रिश्ते वास्तव में सामान्य होते हैं या फिर यह विवाद किसी नए मोड़ के साथ दोबारा सामने आता है।
फिलहाल हजारीबाग की राजनीति में “राम-लक्ष्मण” और “हस्तिनापुर” की यह कहानी लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।
Reviewed by PSA Live News
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9:52:00 pm
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