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बिहार भाजपा में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, प्रदेश पदाधिकारियों की नई सूची जारी

इस बार नीतीश मिश्रा का नाम गायब, सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म



पटना।
बिहार भाजपा ने शुक्रवार को प्रदेश पदाधिकारियों की नई सूची जारी कर दी। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की ओर से जारी इस सूची में कुल 38 नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। लेकिन सबसे अधिक चर्चा जिस बात को लेकर हो रही है, वह है वरिष्ठ भाजपा नेता और बिहार सरकार के मंत्री नीतीश मिश्रा का नाम सूची से नदारद होना।

नई सूची में कई पुराने चेहरों को जगह मिली है तो कई नए नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर भाजपा ने आगामी राजनीतिक रणनीति का संकेत भी दे दिया है। पार्टी ने प्रदेश उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, कोषाध्यक्ष, सह-कोषाध्यक्ष और मुख्यालय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां की हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर खास तौर पर इस बात पर टिक गई है कि बिहार भाजपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिने जाने वाले नीतीश मिश्रा को इस बार प्रदेश संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। जबकि हाल के महीनों में वे बिहार की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे हैं और सरकार में भी महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे हैं।

भाजपा ने साधा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन

सूची पर नजर डालें तो भाजपा ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। मिथिलांचल, मगध, सीमांचल, भोजपुर और तिरहुत क्षेत्र से नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। महिला नेताओं को भी संगठन में पर्याप्त भागीदारी दी गई है।

प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर हरिभूषण ठाकुर बचौल, राकेश कुमार, संतोष पाठक, मनोज कुमार सिंह, अन्नीका पासवान, रमा सिंह, पवन जायसवाल, प्रवण कुमार यादव समेत कई नेताओं को जगह दी गई है। वहीं प्रदेश महामंत्री के रूप में सरोज रंजन पटेल, धनराज शर्मा, प्रीति शेखर, मिलन अमितेश और राजेश झा उर्फ राजू झा को जिम्मेदारी मिली है।

प्रदेश मंत्री पद पर भी कई नए और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका दिया गया है। पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के संकेत दिए हैं।

क्या संगठन और सरकार में अलग-अलग भूमिका तय कर रही भाजपा?

नीतीश मिश्रा का नाम सूची में नहीं होना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। भाजपा सूत्रों की मानें तो पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन और सरकार की जिम्मेदारियों को अलग-अलग तरीके से बांटने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि सरकार में सक्रिय नेताओं को संगठन में सीमित भूमिका देने की नीति अपनाई जा सकती है।

हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के भीतर चल रहे नए शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

संजय सरावगी के नेतृत्व में नई टीम

प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने नई टीम के जरिए संगठन को ज्यादा आक्रामक और चुनावी मोड में लाने का प्रयास किया है। पार्टी का फोकस आगामी विधानसभा चुनाव, संगठन विस्तार, बूथ सशक्तिकरण और एनडीए के पक्ष में माहौल बनाने पर रहेगा।

सूची जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। वहीं जिन नेताओं को जगह नहीं मिली है, उनके समर्थकों के बीच हल्की नाराजगी भी सामने आने लगी है।

सियासी मायने भी निकाले जा रहे

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार भाजपा की यह नई टीम सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा अब राज्य में नए चेहरों को आगे बढ़ाने और सामाजिक समीकरणों को नए ढंग से साधने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।

नीतीश मिश्रा जैसे वरिष्ठ नेता का नाम सूची में नहीं होना आने वाले दिनों में बिहार भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर और चर्चाओं को जन्म दे सकता है। हालांकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बता सकता है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बिहार भाजपा में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, प्रदेश पदाधिकारियों की नई सूची जारी बिहार भाजपा में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, प्रदेश पदाधिकारियों की नई सूची जारी Reviewed by PSA Live News on 7:10:00 pm Rating: 5

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