अब 33 की जगह 38 जज होंगे नियुक्त, लंबित मामलों के तेजी से निपटारे की उम्मीद
नई दिल्ली : देश की न्यायिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 38 करने को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय का उद्देश्य देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मामलों के बोझ को कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज एवं सुचारु बनाना है।
केंद्र सरकार की सिफारिश पर लिया गया यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट में हजारों मामले लंबित हैं और लगातार बढ़ते मुकदमों के कारण न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है। जजों की संख्या बढ़ने से संविधान पीठ, जनहित याचिकाओं, आपराधिक मामलों, नागरिक विवादों और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता थी। वर्तमान में बढ़ती आबादी, बढ़ते कानूनी विवाद और जटिल मामलों के कारण सुप्रीम कोर्ट पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति न्यायपालिका की कार्यक्षमता को मजबूत करेगी।
सूत्रों के अनुसार, जजों की संख्या बढ़ने के बाद नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जा सकती है। इससे विभिन्न मामलों की सुनवाई के लिए अधिक बेंच गठित हो सकेंगी और लंबित मामलों के निपटारे की गति तेज होगी।
न्यायपालिका से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह फैसला आम लोगों को समय पर न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों के कारण लोगों को वर्षों तक न्याय का इंतजार करना पड़ता है। अब जजों की संख्या बढ़ने से सुनवाई में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद यह निर्णय देश की न्यायिक संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में न्याय व्यवस्था की कार्यक्षमता और आम नागरिकों के भरोसे पर भी दिखाई दे सकता है।
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4:43:00 pm
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