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पहाड़ी मंदिर प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल: नई समिति का बड़ा खुलासा, पारदर्शिता और ‘नो VIP कल्चर’ का ऐलान

रांची | विशेष संवाददाता |

झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर के प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नवगठित प्रबंध समिति ने पूर्व प्रबंधन पर गंभीर अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए बड़ा खुलासा किया है, वहीं मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और समान व्यवस्था लागू करने का भरोसा दिया है।

 प्रेस वार्ता में आरोपों का सिलसिलेवार खुलासा

झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा गठित नई समिति के पदाधिकारियों ने मंदिर परिसर के समीप आयोजित प्रेस वार्ता में कई अहम मुद्दों को सार्वजनिक किया।

समिति के सचिव राकेश सिन्हा ने पूर्व प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर परिसर में मौजूद करोड़ों रुपये मूल्य की लोहे और प्लास्टिक सामग्री को बिना किसी निविदा प्रक्रिया और सरकारी मूल्यांकन के बेचा गया, जो गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

 हाईकोर्ट के निर्देश पर नई समिति का गठन

सिन्हा ने बताया कि नई समिति का गठन माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में विधिसम्मत तरीके से किया गया है। उन्होंने कहा कि

  • पूर्व समिति को 09 जनवरी 2026 और 10 अप्रैल 2026 को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया
  • संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर
  • 23 अप्रैल 2026 को बोर्ड की बैठक में संबंधित धाराओं के तहत नई समिति गठित की गई

 ताला तोड़ने और दस्तावेज ले जाने का आरोप, FIR दर्ज

नई समिति ने यह भी दावा किया कि पूर्व प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों द्वारा मंदिर कार्यालय का ताला तोड़कर महत्वपूर्ण दस्तावेज ले जाने और परिसर को नुकसान पहुंचाने की घटना हुई। इस मामले में सुखदेवनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसकी जांच जारी है।

 विकास योजनाओं में बाधा का आरोप

समिति के सदस्य बादल सिंह ने बताया कि मंदिर के विकास के लिए राज्य सरकार से ₹6.74 करोड़ की राशि स्वीकृत कराने का प्रयास किया गया है।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ठेकेदारी प्रक्रिया में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे

  • कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है
  • वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ रही है

 ‘VIP कल्चर’ खत्म करने का ऐलान

नई समिति ने साफ किया कि उसका मुख्य उद्देश्य मंदिर प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता लाना और श्रद्धालुओं को समान अवसर देना है। इसके तहत:

  • मंदिर परिसर में VIP संस्कृति खत्म की जाएगी
  • सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से पूजा-अर्चना का अवसर मिलेगा

 4 मई को अध्यक्ष संभालेंगे पदभार

समिति ने जानकारी दी कि इसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस.एन. पाठक 4 मई 2026 को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे, जिसके बाद प्रबंधन में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

 सहयोग की अपील

प्रेस वार्ता के अंत में समिति ने वर्तमान और पूर्व प्रबंधन से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि मंदिर के विकास और बेहतर व्यवस्था के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।

इस अवसर पर दीपक ओझा, राजेश साहू, अरुण वर्मा, मेहुल प्रसाद, अजय सिंह, रिवाल्डो वर्मा, अमन सिंह सहित कई गणमान्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पहाड़ी मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के प्रबंधन को लेकर उठे ये आरोप न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि आने वाले दिनों में इस मामले के और तूल पकड़ने के संकेत भी देते हैं। अब सबकी नजर जांच और नई समिति के कामकाज पर टिकी है, जो मंदिर व्यवस्था में सुधार और भरोसा कायम करने की चुनौती से जूझ रही है।

पहाड़ी मंदिर प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल: नई समिति का बड़ा खुलासा, पारदर्शिता और ‘नो VIP कल्चर’ का ऐलान पहाड़ी मंदिर प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल: नई समिति का बड़ा खुलासा, पारदर्शिता और ‘नो VIP कल्चर’ का ऐलान Reviewed by PSA Live News on 9:44:00 pm Rating: 5

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