मानव सेवा का अनूठा उदाहरण: 16 दिनों में 3560 दिव्यांग एवं निराश्रितों को कराया गया भोजन, आश्रम में बही करुणा और सेवा की गंगा
जरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना : संजय सर्राफ
रांची। समाज में मानवता, करुणा और सेवा की भावना को साकार करते हुए एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, रांची द्वारा संचालित सेवा कार्यों ने एक बार फिर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। परमहंस डॉ. संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम, पुंदाग के तत्वावधान में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार), रांची में रह रहे मंदबुद्धि, दिव्यांग एवं निराश्रित लोगों के बीच विशेष अन्नपूर्णा सेवा अभियान चलाया गया।
इस दौरान आश्रम में निवास कर रहे 48 मंदबुद्धि, दिव्यांग एवं निराश्रित प्रभुजनों तथा उनकी देखभाल में लगे सेवादारों को विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट, पौष्टिक एवं संतुलित व्यंजनों से युक्त भोजन प्रसाद कराया गया। भोजन की व्यवस्था आश्रम के रसोईघर में विशेष रूप से कराई गई, जहां स्वच्छता और पोषण का पूरा ध्यान रखते हुए भोजन तैयार किया गया।
16 दिनों में 3560 लोगों तक पहुंची अन्नपूर्णा सेवा
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 16 मई से 31 मई तक चलाए गए विशेष अन्नपूर्णा सेवा अभियान के दौरान कुल 3560 निराश्रित, दिव्यांग एवं मंदबुद्धि प्रभुजनों तथा उनकी सेवा में लगे सेवादारों के बीच भोजन प्रसाद वितरित किया गया।
उन्होंने बताया कि यह अभियान केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से समाज में सेवा, संवेदना और सहयोग का संदेश भी दिया गया। कई समाजसेवियों और श्रद्धालुओं ने स्वयं आगे बढ़कर भोजन सेवा का दायित्व निभाया, जबकि अनेक लोगों ने आश्रम में रह रहे जरूरतमंदों के लिए खाद्य सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराए।
मानवता की सेवा को मिला समाज का सहयोग
संजय सर्राफ ने कहा कि किसी भी सेवा कार्य की सफलता समाज के सामूहिक सहयोग से ही संभव होती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब कई लोग अपने जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब समाज के सक्षम वर्ग का दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वह जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आए।
उन्होंने कहा कि आश्रम में रह रहे कई लोग ऐसे हैं जिन्हें परिवार, समाज और परिस्थितियों ने असहाय बना दिया है। ऐसे लोगों की सेवा करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
"मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं"
अपने संबोधन में संजय सर्राफ ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने कहा कि भूखे को भोजन, असहाय को सहारा और निराश्रित को सम्मान देना ही सच्चे अर्थों में ईश्वर की आराधना है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा में जो आत्मिक संतोष प्राप्त होता है, वह किसी अन्य कार्य में संभव नहीं है।
उन्होंने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि ऐसे सेवा कार्यों में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस न करे। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब उसमें करुणा, सहयोग और सेवा की भावना जीवित रहे।
सेवा कार्य में अनेक गणमान्य लोगों की रही सक्रिय सहभागिता
अन्नपूर्णा सेवा अभियान को सफल बनाने में ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, अरविंद अग्रवाल, सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे और सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया।
सेवा, संवेदना और संस्कार का संगम
रांची में चल रहा यह सेवा अभियान न केवल दिव्यांग और निराश्रित लोगों के जीवन में खुशियां ला रहा है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है। अन्नपूर्णा सेवा के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करे, तो कोई भी जरूरतमंद भूखा या असहाय नहीं रहेगा।
मानवता की सेवा को समर्पित यह पहल समाज में प्रेम, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Reviewed by PSA Live News
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8:53:00 pm
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