योग केवल अभ्यास नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय जीवन की कुंजी है : संजय सर्राफ
रांची। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष एवं झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि योग आज केवल भारत की सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए स्वास्थ्य, शांति और संतुलित जीवन का मार्गदर्शक बन चुका है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मानव जीवन में शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का वैश्विक अभियान बन गया है।
संजय सर्राफ ने कहा कि योग भारत की हजारों वर्ष पुरानी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जिसने समय की सीमाओं को पार करते हुए पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन का संदेश दिया है। आज विश्व के लगभग सभी देशों में योग का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है और करोड़ों लोग इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना चुके हैं।
उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत भारत की पहल पर हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने ऐतिहासिक संबोधन के दौरान योग को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड संख्या में देशों का समर्थन प्राप्त हुआ और 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। इसके बाद 21 जून 2015 को पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरी दुनिया में अभूतपूर्व उत्साह और सहभागिता के साथ मनाया गया।
संजय सर्राफ ने कहा कि 21 जून का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व भी है। यह वर्ष का सबसे लंबा दिन अर्थात ग्रीष्म अयनांत होता है, जिसे भारतीय परंपरा में विशेष ऊर्जा और चेतना का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण इस दिन को योग दिवस के लिए चुना गया।
उन्होंने कहा कि योग को केवल शारीरिक व्यायाम मानना उसकी व्यापकता को सीमित करना होगा। वास्तव में योग जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करती है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक रूप से भी अधिक मजबूत और सकारात्मक बनता है। योग व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मनियंत्रण की भावना विकसित करता है।
संजय सर्राफ ने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मानसिक तनाव, अनियमित खानपान और तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता ने लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। तनाव, अवसाद, चिंता, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान के रूप में सामने आया है। चिकित्सा विशेषज्ञों और शोध संस्थानों ने भी यह स्वीकार किया है कि नियमित योगाभ्यास कई जीवनशैली संबंधी बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होता है।
उन्होंने कहा कि योग का सबसे बड़ा संदेश संतुलन का है। यह केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि मन को शांत और विचारों को सकारात्मक बनाने की प्रक्रिया है। योग व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। यही कारण है कि आज योग को वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य संरक्षण और मानसिक कल्याण के महत्वपूर्ण साधन के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
संजय सर्राफ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करना, उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा विश्वभर में शांति, सद्भाव और मानव कल्याण का संदेश फैलाना है। इस अवसर पर विभिन्न देशों में लाखों लोग एक साथ योगाभ्यास करते हैं, जो वैश्विक एकता और मानवता की साझा चेतना का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने बताया कि 21 जून को देशभर में विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक योग के महत्व को पहुंचाना और लोगों को इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना है।
संजय सर्राफ ने युवाओं से विशेष रूप से योग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आज का युवा वर्ग मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अत्यधिक व्यस्त है, जिसके कारण शारीरिक गतिविधियां कम होती जा रही हैं। योग युवाओं को मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास, स्मरण शक्ति और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद करता है। विद्यार्थियों के लिए योग परीक्षा तनाव को कम करने और बेहतर प्रदर्शन का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के लिए भी योग अत्यंत लाभकारी है। योग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी योग और प्राणायाम की उपयोगिता पूरी दुनिया ने महसूस की थी।
अंत में संजय सर्राफ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक सोच ही सफल एवं सुखी जीवन की आधारशिला हैं। योग केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ, जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण का भी माध्यम है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय योग के लिए निकालना चाहिए ताकि वह स्वयं स्वस्थ रह सके और समाज को भी स्वस्थ बनाने में योगदान दे सके।
उन्होंने कहा कि योग वास्तव में मानवता को जोड़ने वाला, स्वास्थ्य और शांति का सार्वभौमिक संदेश है। आज आवश्यकता इस बात की है कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। तभी "स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ राष्ट्र" की परिकल्पना साकार हो सकेगी।
Reviewed by PSA Live News
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7:27:00 pm
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