पटना के आलीशान फ्लैट में 6 घंटे तक चली छापेमारी, 2 करोड़ के जेवर और लाखों की नकदी बरामद
सरकारी टेंडरों में हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज, देर रात पूछताछ के लिए साथ ले गई एसवीयू टीम
पीएसए न्यूज | विशेष संवाददाता | पटना।
बिहार में सरकारी टेंडरों की कथित हेराफेरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बहुचर्चित मामले में बुधवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने आरोपी ठेकेदार रिशुश्री के पटना स्थित ठिकाने पर व्यापक छापेमारी की। राजधानी के मीठापुर इलाके में स्थित कामत राम सखी एन्क्लेव के फ्लैट नंबर-5ए में चली इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी को भारी मात्रा में आभूषण और नकदी मिलने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, सुबह शुरू हुई यह कार्रवाई लगभग छह घंटे तक चली, जिसमें एसवीयू अधिकारियों ने फ्लैट के हर कमरे, अलमारी, लॉकर, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच की। तलाशी के दौरान करीब दो करोड़ रुपये मूल्य के सोने-हीरे के आभूषण तथा लगभग 2.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। बरामद संपत्तियों के स्रोत और स्वामित्व को लेकर जांच एजेंसी अब विस्तृत पड़ताल कर रही है।
टेंडर घोटाले की जांच में बड़ा मोड़
जांच एजेंसियों के अनुसार रिशुश्री पर आरोप है कि उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर अपनी कंपनी रिलायबल इंफ्रा सर्विसेस को अनुचित लाभ पहुंचाया। आरोप है कि सरकारी परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी कर ठेके हासिल किए गए तथा इस प्रक्रिया में कई प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त था।
इस मामले में पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है। ईडी लंबे समय से वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और बैंक खातों की जांच कर रही है। अब एसवीयू की कार्रवाई से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
आईएएस संजीव हंस से नजदीकी चर्चा में
जांच के दायरे में आए रिशुश्री को बिहार प्रशासनिक तंत्र के कई प्रभावशाली अधिकारियों का करीबी माना जाता रहा है। सूत्रों के मुताबिक उनकी पहचान बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारियों, विभागीय इंजीनियरों और राजनीतिक हस्तियों से रही है। हालांकि जांच एजेंसियां अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर रही हैं, लेकिन छापेमारी के बाद इन संबंधों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अधिकारियों का मानना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जो टेंडर आवंटन और वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क को समझने में मदद करेंगी।
पटना हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
रिशुश्री को कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा झटका लग चुका है। जानकारी के अनुसार, सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को चुनौती देते हुए उन्होंने पटना हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने हाल ही में उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों को कार्रवाई करने में और मजबूती मिली है। अदालत द्वारा राहत नहीं दिए जाने के कारण अब जांच प्रक्रिया और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
देर रात पूछताछ के लिए साथ ले गई एसवीयू
छापेमारी के बाद देर रात एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सूत्रों के अनुसार एसवीयू की टीम रिशुश्री को पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर गई। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने कुछ आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की बात कहकर उन्हें कार्यालय बुलाया, जिसके बाद उनसे विस्तृत पूछताछ शुरू की गई।
हालांकि देर रात तक उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। एसवीयू की ओर से भी इस संबंध में कोई लिखित बयान जारी नहीं किया गया। लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों का मिलान कर रही है तथा वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेज जांच के केंद्र में
छापेमारी के दौरान बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बैंक दस्तावेज, संपत्ति संबंधी कागजात और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को जांच के लिए जब्त किए जाने की भी चर्चा है। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, कंपनियों के बीच हुए लेन-देन और संपत्ति अर्जन के स्रोतों का पता चल सकता है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित रूप से अर्जित धनराशि को किन माध्यमों से विभिन्न संपत्तियों, कंपनियों और निवेश योजनाओं में लगाया गया।
बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल
एसवीयू की इस कार्रवाई ने बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सरकारी टेंडरों से जुड़े इस मामले को राज्य के हालिया वर्षों के सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है। जांच की दिशा और बरामद दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद आने वाले दिनों में कई नए खुलासे होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो कई अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल एसवीयू, ईडी और अन्य एजेंसियां विभिन्न पहलुओं पर समानांतर रूप से जांच कर रही हैं।
क्या कहते हैं जानकार?
भ्रष्टाचार निरोधक मामलों के जानकारों का कहना है कि सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच बेहद जटिल होती है। इसमें कंपनियों के नेटवर्क, बैंकिंग चैनलों, संपत्तियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के संबंधों की गहन पड़ताल करनी पड़ती है। ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल पूरे मामले पर बिहार की नजरें टिकी हुई हैं। एसवीयू की छापेमारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जांच एजेंसियां अब इस बहुचर्चित मामले में हर पहलू की गहराई से पड़ताल करने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Reviewed by PSA Live News
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7:44:00 am
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