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मुख्यमंत्री के हाथों मिला नियुक्ति पत्र, लेकिन स्कूल तक नहीं पहुंच सकीं सुलेखा

पदस्थापना का इंतजार करते-करते सड़क हादसे में चली गई नव नियुक्त सहायक शिक्षिका की जान, दो मासूम बच्चों से छिना मां का साया; शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल


सरायकेला। 
महज तीन महीने पहले तक जिन हाथों में सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र था, उन्हीं हाथों की जिंदगी अब हमेशा के लिए थम चुकी है। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त कर सरकारी शिक्षिका बनने का सपना देखने वाली नव नियुक्त सहायक शिक्षिका सुलेखा महतो अब इस दुनिया में नहीं रहीं। एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने न केवल उनके जीवन का अंत कर दिया, बल्कि दो मासूम बच्चों के सिर से मां का साया भी छीन लिया। इस हृदयविदारक घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, पदस्थापना प्रक्रिया में कथित देरी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा प्रखंड अंतर्गत भालुरूंगी गांव की रहने वाली सुलेखा महतो ने कठिन परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने बी.एड. की डिग्री हासिल की, झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) उत्तीर्ण की और चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद सहायक शिक्षिका के रूप में नियुक्ति प्राप्त की। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलने के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। सभी को विश्वास था कि अब परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और सुलेखा अपने सपनों के साथ-साथ सैकड़ों बच्चों का भविष्य भी संवारेंगी।

परिजनों का आरोप है कि नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद पिछले लगभग तीन महीनों तक उन्हें किसी विद्यालय में पदस्थापित नहीं किया गया। बताया जाता है कि इस अवधि में उन्हें प्रतिदिन सरायकेला जिला शिक्षा कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बुलाया जाता था। हर सुबह वह अपने दो छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर इस उम्मीद के साथ निकलती थीं कि शायद आज उन्हें किसी विद्यालय में पदस्थापना का आदेश मिल जाएगा। लेकिन यह इंतजार लगातार लंबा होता गया।

बताया जाता है कि 24 जून की सुबह भी सुलेखा महतो रोज़ की तरह जिला शिक्षा कार्यालय पहुंचीं, अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और उसके बाद अपने देवर के साथ स्कूटी से घर लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार हाईवा ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि सुलेखा सड़क पर गिर गईं और भारी वाहन की चपेट में आने से उनकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। उनके साथ मौजूद देवर किसी तरह बच गए, लेकिन सुलेखा को बचाया नहीं जा सका।

इस दुखद घटना के बाद पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में अब भी वह नियुक्ति पत्र सुरक्षित रखा है, जो उनके संघर्ष, मेहनत और सफलता का प्रतीक था, लेकिन उसे हासिल करने वाली सुलेखा अब इस दुनिया में नहीं हैं। पति ने अपना जीवनसाथी खो दिया, दो मासूम बच्चों ने अपनी मां और वृद्ध माता-पिता ने अपनी बेटी को हमेशा के लिए खो दिया।

घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियुक्ति के तुरंत बाद विद्यालय में पदस्थापना कर दी जाती, तो संभव है कि उन्हें प्रतिदिन जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ता। हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से क्या कारण रहे, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

अब यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नियुक्ति के बाद पदस्थापना प्रक्रिया, प्रशासनिक विलंब और सरकारी व्यवस्था की कार्यशैली पर भी बहस छिड़ गई है। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि नियुक्ति के बाद भी सुलेखा महतो को विद्यालय में पदस्थापित क्यों नहीं किया गया और यदि प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, सुलेखा महतो की कहानी एक ऐसे अधूरे सपने की कहानी बन गई है, जिसने पूरे राज्य को भावुक कर दिया है। जिस शिक्षिका ने हजारों बच्चों का भविष्य संवारने का सपना देखा था, वह स्वयं अपने सपनों को साकार करने से पहले ही इस दुनिया से विदा हो गईं। अब उनके परिजन न्याय, निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि समाज इस दर्दनाक घटना को लंबे समय तक याद रखेगा।

मुख्यमंत्री के हाथों मिला नियुक्ति पत्र, लेकिन स्कूल तक नहीं पहुंच सकीं सुलेखा मुख्यमंत्री के हाथों मिला नियुक्ति पत्र, लेकिन स्कूल तक नहीं पहुंच सकीं सुलेखा Reviewed by PSA Live News on 8:29:00 pm Rating: 5

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