प्राकृतिक खेती और श्री अन्न से सशक्त होगा कृषि क्षेत्र, किसानों की समृद्धि से ही बनेगा विश्वगुरु हिंदुस्तान : स्वामी भावेशानंद
दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, मोराबादी में प्राकृतिक खेती एवं श्री अन्न पर भव्य कार्यशाला, सैकड़ों किसानों ने लिया हिस्सा
रांची, संवाददाता।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराने तथा श्री अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रांची स्थित दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, मोराबादी में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। झारखंड भाजपा किसान मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों किसानों, कृषि विशेषज्ञों एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन साहू ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी भावेशानंद उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों, जैविक संसाधनों के उपयोग तथा श्री अन्न की खेती के आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभों की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक चुनौतियों के बीच टिकाऊ और लाभकारी खेती के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
कृषि और किसान ही हिंदुस्तान की असली शक्ति : स्वामी भावेशानंद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी भावेशानंद ने कहा कि हिंदुस्तान मूल रूप से कृषि प्रधान देश है और यहां की अर्थव्यवस्था, संस्कृति तथा सामाजिक संरचना का आधार कृषि ही रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की स्थिति मजबूत होगी तो देश की अर्थव्यवस्था स्वतः सुदृढ़ होगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2047 तक विकसित हिंदुस्तान और विश्वगुरु बनने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसकी सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार कृषि क्षेत्र ही है। उन्होंने कहा कि खेतों में समृद्धि आए बिना राष्ट्र की समृद्धि संभव नहीं है। किसानों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती की ओर लौटना होगा, जिससे उत्पादन भी बढ़े और प्रकृति का संतुलन भी बना रहे।
स्वामी भावेशानंद ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भूमि और स्वच्छ पर्यावरण छोड़ने का संकल्प लें।
रासायनिक खेती से बढ़ रही चुनौतियां, प्राकृतिक खेती ही विकल्प : पवन साहू
झारखंड भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन साहू ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ दशकों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है, जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं और खेती की लागत तेजी से बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि किसान अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक पदार्थों का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। कैंसर, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों में वृद्धि के पीछे भी रासायनिक अवशेषों से युक्त खाद्य पदार्थों को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
पवन साहू ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
श्री अन्न पोषण और स्वास्थ्य का खजाना : डॉ. बिसाखा सिंह
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. बिसाखा सिंह ने श्री अन्न अर्थात मोटे अनाजों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मड़ुवा (रागी), कोदो, बाजरा, ज्वार तथा अन्य मोटे अनाज पोषक तत्वों का भंडार हैं।
उन्होंने कहा कि इनमें कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन और अनेक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह, मोटापा और हृदय रोगों की रोकथाम में भी श्री अन्न का विशेष योगदान है।
डॉ. सिंह ने किसानों को बताया कि वर्तमान समय में देश और विदेश दोनों बाजारों में मिलेट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में किसान यदि श्री अन्न की खेती अपनाते हैं तो उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है।
गोबर, गोमूत्र और प्राकृतिक संसाधनों से तैयार करें जैविक खाद
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अजित कुमार सिंह ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को गोमूत्र, गोबर, बेसन और गुड़ से तैयार किए जाने वाले विभिन्न जैविक घोलों एवं खादों के निर्माण की प्रक्रिया समझाई।
उन्होंने बताया कि इन प्राकृतिक संसाधनों से तैयार जैविक खाद मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ाती है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। साथ ही यह फसल की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन लागत कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत और प्राकृतिक कीटनाशकों के उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था का आधार बन सकती है।
किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प
कार्यशाला के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने तथा श्री अन्न के उत्पादन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री अर्जुन सिंह, राजेश कुशवाहा, अरबिंद्र सिंह खुराना, विनोद ठाकुर, अजय मुंडा, रांची महानगर अध्यक्ष वरुण साहू, ग्रामीण जिला पूर्वी अध्यक्ष धीरज कुमार महतो, प्रदेश मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र सिंह, सुरेंद्र महतो, सज्जन कुमार पंकज, संजय मंडल, अवदेश दुबे, बिट्टी सहदेव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती और श्री अन्न आधारित कृषि मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। किसानों की सक्रिय भागीदारी और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के माध्यम से झारखंड कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात कर सकता है।
Reviewed by PSA Live News
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8:21:00 pm
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