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आईआईटियन बाबा का मायाजाल: कृष्ण भक्ति, आध्यात्मिकता और इंजीनियरिंग की छवि के सहारे युवाओं को बनाया शिकार, दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तारी के बाद खुल रहे चौंकाने वाले राज


पीएसए लाइव न्यूज | विशेष संवाददाता ।

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन क्षेत्र से सामने आया तथाकथित "आईआईटियन बाबा" का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह आधुनिक समाज में आध्यात्मिकता की आड़ में युवाओं को प्रभावित करने और उनका शोषण करने के खतरनाक नेटवर्क का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास की गिरफ्तारी के बाद उसके आश्रम और गतिविधियों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

पुलिस जांच में पता चला है कि बाबा ने अपनी शैक्षणिक योग्यता, प्रभावशाली व्यक्तित्व और धार्मिक प्रवचनों का ऐसा मिश्रण तैयार किया था, जिससे बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवक-युवतियां उसके प्रभाव में आ जाते थे। उसके आश्रम में आने वाले अधिकांश लोग इंजीनियरिंग, आईटी, प्रबंधन और निजी कंपनियों में कार्यरत युवा थे। इनमें कई ऐसी युवतियां भी शामिल थीं जिन्होंने कथित रूप से अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और गोवर्धन में रहकर बाबा की सेवा तथा उसके आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने लगीं।

कृष्ण भक्ति के नाम पर तैयार किया गया प्रभाव का तंत्र

स्थानीय लोगों और पुलिस सूत्रों के अनुसार आश्रम में पहुंचते ही अभिषेक मिश्रा का पूरा व्यक्तित्व कृष्णमय दिखाई देता था। वह घंटों तक ढोलक बजाकर भजन गाता, कृष्ण लीला का वर्णन करता और आध्यात्मिक प्रवचन देता था। उसके कार्यक्रमों में भक्ति, संगीत, दर्शन और आधुनिक विज्ञान का ऐसा मिश्रण प्रस्तुत किया जाता था कि शिक्षित युवा भी तेजी से प्रभावित हो जाते थे।

बताया जा रहा है कि बाबा स्वयं को साधारण संत नहीं बल्कि विशेष आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता था। कई अनुयायियों के बीच यह प्रचारित किया जाता था कि वह भगवान कृष्ण से सीधा संवाद कर सकता है तथा साधकों को भी "कृष्ण साक्षात्कार" करा सकता है। यही दावा उसके प्रभाव का सबसे बड़ा आधार बन गया।

आईआईटी की डिग्री बनी विश्वास जीतने का हथियार

जांच में सामने आया है कि बाबा ने अपनी आईआईटी की पृष्ठभूमि का अत्यंत सुनियोजित तरीके से उपयोग किया। प्रवचन देने से पहले वह संबंधित विषयों का गहन अध्ययन करता था। धार्मिक कथाओं के साथ वैज्ञानिक अवधारणाओं और तकनीकी उदाहरणों को जोड़कर अपनी बात रखता था। इससे श्रोताओं को लगता था कि वह केवल धार्मिक व्यक्ति नहीं बल्कि अत्यंत बुद्धिमान और तार्किक संत है।

युवाओं को यह विश्वास दिलाया जाता था कि आधुनिक विज्ञान और सनातन आध्यात्मिकता का वास्तविक संगम उसके पास है। इसी वजह से इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवक-युवतियां बड़ी संख्या में उससे जुड़ते चले गए।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, “उसकी बातचीत में आत्मविश्वास था। वह सामने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति को समझकर उसी के अनुरूप जवाब देता था। पढ़े-लिखे युवाओं पर उसका प्रभाव काफी गहरा था।”

ऑनलाइन प्रवचनों से बनाया देशव्यापी नेटवर्क

जानकारी के अनुसार अभिषेक मिश्रा ने केवल आश्रम तक ही अपनी गतिविधियां सीमित नहीं रखीं। उसने सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्रवचन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल बैठकों के माध्यम से एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।

देश के विभिन्न राज्यों से युवक-युवतियां उसके ऑनलाइन कार्यक्रमों में भाग लेते थे। धीरे-धीरे उन्हें आश्रम आने के लिए प्रेरित किया जाता था। कई लोग कुछ दिनों के लिए आते थे, जबकि कुछ महीनों तक आश्रम में रहकर तथाकथित आध्यात्मिक साधना करते थे।

सूत्रों के अनुसार आश्रम में रहने वाले अनुयायियों के बीच एक ऐसा माहौल बनाया जाता था जिसमें बाबा को असाधारण व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। नए आने वाले लोगों को पुराने शिष्य उसकी कथित चमत्कारी शक्तियों और आध्यात्मिक अनुभवों के बारे में बताते थे।

युवतियों को मानसिक रूप से प्रभावित करने का आरोप

पुलिस जांच के दौरान सामने आया है कि आश्रम में आने वाली युवतियों को धीरे-धीरे बाबा के प्रति पूर्ण समर्पण के लिए प्रेरित किया जाता था। जांच अधिकारियों के अनुसार जो युवतियां शुरुआत में बाबा के दावों पर विश्वास नहीं करती थीं, उन्हें लगातार संवाद, धार्मिक चर्चाओं और तथाकथित आध्यात्मिक तर्कों के माध्यम से प्रभावित किया जाता था।

बताया जा रहा है कि आश्रम के कुछ अनुयायी भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते थे। वे नए लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते थे कि बाबा कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि कलयुग में भगवान कृष्ण के अवतार हैं।

यही कारण था कि कई युवक-युवतियां धीरे-धीरे अपने परिवारों और पुराने सामाजिक दायरे से दूर होकर आश्रम केंद्रित जीवन जीने लगी थीं।

शिकायत के बाद खुला पूरा मामला

पूरा मामला तब सामने आया जब एक युवती ने बाबा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में दुष्कर्म और दुष्कर्म के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद आश्रम से जुड़े कई लोगों में हड़कंप मच गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही मंगलवार को ही कई युवक-युवतियां गोवर्धन छोड़कर चले गए। इससे आश्रम के भीतर की गतिविधियों को लेकर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।

2023 में छोड़ी नौकरी, बना संन्यासी

मूल रूप से ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर का रहने वाला अभिषेक मिश्रा पढ़ाई में मेधावी माना जाता था। उसने प्रतिष्ठित आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी। डिग्री के बाद उसने लगभग दो वर्षों तक निजी क्षेत्र में नौकरी भी की।

वर्ष 2023 में उसने अचानक संन्यास लेने की घोषणा की और अपना नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रख लिया। इसके बाद उसने मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र में आश्रम स्थापित किया और धार्मिक गतिविधियां शुरू कर दीं। देखते ही देखते उसने युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बना ली।

पुलिस कर रही गहन जांच

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आश्रम से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सोशल मीडिया अकाउंट्स, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं और भी कोई पीड़ित सामने आ सकता है या नहीं।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आश्रम के संचालन, वित्तीय लेनदेन और अनुयायियों को जोड़ने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही है।

समाज के लिए गंभीर चेतावनी

आईआईटियन बाबा का मामला इस बात की गंभीर चेतावनी है कि आधुनिक शिक्षा, प्रभावशाली व्यक्तित्व और धार्मिक भाषा का इस्तेमाल करके किस प्रकार लोगों का विश्वास जीता जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों के माध्यम से ऐसे प्रभावशाली व्यक्तियों का दायरा तेजी से बढ़ता है, इसलिए लोगों को किसी भी व्यक्ति के चमत्कार, दिव्य शक्तियों या अलौकिक दावों पर आंख मूंदकर विश्वास करने के बजाय विवेक और सावधानी से काम लेना चाहिए।

मथुरा का यह मामला अब केवल एक बाबा की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आस्था, विश्वास, मनोवैज्ञानिक प्रभाव और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अनेक गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है, जिनके जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

आईआईटियन बाबा का मायाजाल: कृष्ण भक्ति, आध्यात्मिकता और इंजीनियरिंग की छवि के सहारे युवाओं को बनाया शिकार, दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तारी के बाद खुल रहे चौंकाने वाले राज आईआईटियन बाबा का मायाजाल: कृष्ण भक्ति, आध्यात्मिकता और इंजीनियरिंग की छवि के सहारे युवाओं को बनाया शिकार, दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तारी के बाद खुल रहे चौंकाने वाले राज Reviewed by PSA Live News on 9:29:00 am Rating: 5

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