पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़ा! पत्रकार संगठनों की साख पर हमला, आईटी टीम जुटा रही सबूत
नई दिल्ली/रांची। पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने की संभावना है। जनलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) ने दावा किया है कि कुछ असामाजिक तत्व और कथित गिरोह संगठन के नाम पर फर्जी पत्रकार पहचान पत्र (आई-कार्ड) जारी कर रहे हैं तथा उनका उपयोग कर संगठन की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने जारी आधिकारिक बयान में कहा है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के एक पत्रकार साथी के माध्यम से संगठन को एक संदिग्ध पत्रकार पहचान पत्र प्राप्त हुआ। जब संबंधित व्यक्ति ने संगठन के व्हाट्सएप समूह से जुड़ने का अनुरोध किया तो जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उसके पास मौजूद आई-कार्ड संगठन द्वारा जारी नहीं किया गया था। प्रारंभिक जांच में यह कार्ड पूरी तरह से फर्जी पाया गया।
झारखंड कनेक्शन भी आया सामने
मामले की जांच के दौरान एक मोबाइल नंबर झारखंड का सामने आया। संगठन ने जब उस नंबर पर संपर्क किया तो पता चला कि संबंधित व्यक्ति को भी यह आई-कार्ड किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा ई-मेल के माध्यम से भेजा गया था। जांच में वह ई-मेल आईडी भी संगठन के हाथ लगी है, जिसके माध्यम से कथित रूप से फर्जी आई-कार्ड भेजे जा रहे थे।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह कोई साधारण मामला नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से पत्रकारिता की आड़ में चलाया जा रहा फर्जीवाड़ा प्रतीत होता है। ऐसे लोग पत्रकारों के नाम पर अवैध गतिविधियों को अंजाम देकर न केवल पत्रकारिता की छवि खराब कर रहे हैं बल्कि वास्तविक पत्रकारों को भी संदेह के घेरे में ला रहे हैं।
आईटी टीम कर रही डिजिटल जांच
जनलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया की आईटी टीम इस पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी हुई है। ई-मेल ट्रैकिंग, डिजिटल साक्ष्य संग्रहण, आईपी एड्रेस विश्लेषण और अन्य तकनीकी पहलुओं पर काम किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं यह कोई संगठित गिरोह तो नहीं, जो विभिन्न राज्यों में पत्रकार पहचान पत्रों के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहा हो। यदि ऐसा पाया गया तो मामला और भी गंभीर हो सकता है।
उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं से ली जा रही राय
संगठन ने बताया कि इस मामले में उसके कानूनी सलाहकारों से लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है। इन सलाहकारों में विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा सर्वोच्च न्यायालय के अनुभवी विधि विशेषज्ञ शामिल हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति या गिरोह द्वारा किसी पंजीकृत संस्था के नाम, लोगो, पहचान पत्र अथवा डिजिटल पहचान का दुरुपयोग किया गया है तो उसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट), धोखाधड़ी, जालसाजी, साइबर अपराध तथा आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है।
करोड़ों के जुर्माने और जेल का भी हो सकता है प्रावधान
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में फर्जी आई-कार्ड बनाने और वितरित करने की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साइबर अपराध और डिजिटल जालसाजी से जुड़े मामलों में भारी आर्थिक दंड और कारावास दोनों का प्रावधान है।
हालांकि किसी विशेष मामले में दंड का निर्धारण अदालत और जांच एजेंसियों द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल धोखाधड़ी और पहचान की जालसाजी को न्यायालय गंभीर अपराध मानते हैं।
संगठन ने जारी की सार्वजनिक चेतावनी
जनलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित हो रहा उक्त पहचान पत्र पूरी तरह से फर्जी है। संगठन ने सभी पत्रकारों, मीडिया संस्थानों, सरकारी विभागों तथा आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास संदिग्ध या फर्जी आई-कार्ड की जानकारी मिले तो तुरंत संगठन को सूचित करें।
संगठन ने यह भी कहा है कि कोई भी व्यक्ति यदि ऐसे फर्जी पहचान पत्र का उपयोग करता है तो उसके परिणामों के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा।
पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारिता के नाम पर फर्जी पहचान पत्रों का चलन बढ़ा है। कई बार ऐसे लोग सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश पाने के लिए पत्रकार पहचान पत्रों का दुरुपयोग करते हैं। इससे वास्तविक पत्रकारों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की गरिमा को नुकसान पहुंचता है।
जनलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने दोहराया है कि पत्रकारिता की गरिमा, संगठन की प्रतिष्ठा और मीडिया की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए वह हर संभव कदम उठाएगा तथा दोषियों को कानून के दायरे में लाकर ही दम लेगा।
डॉ. अनुराग सक्सेना, राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश
"कुछ देशद्रोही मानसिकता के लोग और पत्रकारिता की आड़ में कार्य करने वाले तत्व संगठन की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी आईटी टीम लगातार जांच कर रही है। सभी डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। दोषियों की पहचान होते ही उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पत्रकारिता की गरिमा और संगठन की प्रतिष्ठा की रक्षा हमारा संकल्प है।"
— डॉ. अनुराग सक्सेना
राष्ट्रीय अध्यक्ष
जनलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.)
Reviewed by PSA Live News
on
2:32:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: