ब्लॉग खोजें

बिहार में कथित फर्जी एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत पर उबाल

मैथिल ब्राह्मण परिषद का आक्रोश, न्यायिक जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग


आरा/पटना, संवाददाता। 
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी युवा सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी की कथित फर्जी एनकाउंटर में हुई मौत का मामला अब पूरे बिहार में राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक बहस का विषय बनता जा रहा है। इस घटना को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, ब्राह्मण समाज तथा मानवाधिकार संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय मैथिल ब्राह्मण परिषद ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने तथा दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

परिषद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना मिश्रा ने इस घटना को लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर कोई आरोप था तो उसे न्यायालय में पेश किया जाना चाहिए था। कानून किसी भी नागरिक को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जीवन से वंचित करने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत तिवारी के मामले में सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला दिया है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण की स्थिति में था और उसके बाद भी उसके खिलाफ घातक कार्रवाई की गई, तो यह केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं बल्कि संविधान और कानून की मूल भावना पर सीधा आघात है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

क्या है पूरा मामला

भोजपुर जिले में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी। पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी। वहीं दूसरी ओर मृतक के परिजनों, स्थानीय ग्रामीणों और कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह एक सुनियोजित फर्जी एनकाउंटर था।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और बयान तेजी से वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है। यही कारण है कि मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी क्षेत्र में सामाजिक कार्यों से जुड़े रहते थे और आम लोगों की समस्याओं को उठाते थे। दूसरी ओर पुलिस रिकॉर्ड और प्रशासनिक पक्ष की भी जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

मैथिल ब्राह्मण परिषद की प्रमुख मांगें

अंतरराष्ट्रीय मैथिल ब्राह्मण परिषद ने बिहार सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं।

1. न्यायिक जांच का गठन

परिषद ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल स्वतंत्र जांच ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने ला सकती है।

2. हत्या का मुकदमा दर्ज हो

संगठन ने मांग की है कि यदि जांच में पुलिस कार्रवाई संदिग्ध पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की हत्या संबंधी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।

3. पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता

परिषद ने भरत तिवारी के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है ताकि परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

4. मानवाधिकार आयोग की निगरानी

संगठन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्य मानवाधिकार आयोग से स्वतः संज्ञान लेकर पूरे मामले की निगरानी करने की अपील की है।

समाज में बढ़ रहा आक्रोश

भरत तिवारी की मौत के बाद भोजपुर सहित बिहार के कई जिलों में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी भी नागरिक को बिना निष्पक्ष सुनवाई के मौत के घाट उतार दिया जाएगा तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत होगा।

ब्राह्मण समाज के कई संगठनों ने भी इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है क्योंकि इसमें कानून व्यवस्था, मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही जैसे कई महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े हुए हैं।

राज्यपाल को सौंपा जाएगा ज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय मैथिल ब्राह्मण परिषद ने घोषणा की है कि संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही भोजपुर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेगा। इसके बाद बिहार के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

परिषद ने कहा है कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील भी की है।

बड़ा सवाल

भरत तिवारी की मौत ने एक बार फिर देश में पुलिस एनकाउंटर की वैधता, जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है। क्या यह पुलिस की वैधानिक कार्रवाई थी या फिर किसी बड़ी चूक का परिणाम? इस प्रश्न का उत्तर केवल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही सामने आ सकता है।

जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी रहेगा। लेकिन एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हर नागरिक को न्याय मिले और कानून का राज कायम रहे।

"हमारी मांगें पूरी हों – न्याय दो"

"भरत तिवारी को न्याय दिलाने के लिए हम एकजुट हैं"

(विशेष संवाददाता रिपोर्ट | प्रकाशन हेतु विस्तारित संस्करण)

बिहार में कथित फर्जी एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत पर उबाल बिहार में कथित फर्जी एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत पर उबाल Reviewed by PSA Live News on 4:06:00 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.