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राज्यसभा चुनाव से पहले गठबंधन में दरार के संकेत, झामुमो ने कांग्रेस को घेरा

राज्यसभा चुनाव को लेकर झामुमो के तेवर तल्ख, कांग्रेस पर कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप


रांची।
झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर तनाव खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस फैसले ने झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाओं को आहत किया है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झारखंड में गठबंधन की राजनीति आपसी सम्मान, संवाद और सहमति के आधार पर चलनी चाहिए। राज्यसभा जैसी महत्वपूर्ण सीट के लिए प्रत्याशी चयन से पहले कांग्रेस को झामुमो नेतृत्व से औपचारिक चर्चा करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी पसंद का नाम सुझा सकती थी, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार झामुमो और गठबंधन नेतृत्व का था। बिना किसी व्यापक परामर्श और सहमति के उम्मीदवार की घोषणा कर देना गठबंधन धर्म की भावना के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि झामुमो ने हमेशा गठबंधन की मजबूती को प्राथमिकता दी है और कई बार बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए सहयोगी दलों के हितों का सम्मान किया है। लेकिन कांग्रेस का यह कदम गठबंधन के भीतर संवादहीनता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस के एकतरफा फैसले से झामुमो के लाखों कार्यकर्ताओं को यह संदेश गया है कि उनकी राजनीतिक भावनाओं और संगठनात्मक योगदान को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुप्रियो भट्टाचार्य ने लोकसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झामुमो ने गठबंधन की एकता बनाए रखने के लिए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नौ सीटें दी थीं। उस समय पार्टी ने अपने संगठनात्मक हितों से ऊपर उठकर गठबंधन की मजबूती को प्राथमिकता दी थी। लेकिन जब बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो ने कांग्रेस से सहयोग और सम्मानजनक हिस्सेदारी की अपेक्षा की, तब पार्टी को पांच सीटें भी नहीं दी गईं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गठबंधन सहयोगियों के बीच संतुलन और सम्मान के सवाल खड़े करती है।

झामुमो महासचिव ने कहा कि गठबंधन केवल चुनावी गणित का विषय नहीं होता, बल्कि यह आपसी विश्वास और राजनीतिक सम्मान पर आधारित व्यवस्था होती है। यदि सहयोगी दलों की राय को दरकिनार किया जाएगा तो स्वाभाविक रूप से कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष पैदा होगा। उन्होंने कहा कि झामुमो के कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक संगठन को मजबूत बनाने के लिए संघर्ष किया है और उनकी भावनाओं की अनदेखी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुप्रियो भट्टाचार्य का यह बयान केवल राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर नाराजगी नहीं है, बल्कि यह गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे, राजनीतिक हिस्सेदारी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चली आ रही असंतुष्टि का सार्वजनिक संकेत भी है। झामुमो नेतृत्व का यह रुख आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।

हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक झामुमो की इस नाराजगी पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राज्यसभा चुनाव के बहाने गठबंधन के भीतर उभरे मतभेद अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गए हैं, जिससे आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन की आंतरिक स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि दोनों दल समय रहते संवाद स्थापित कर मतभेदों को दूर नहीं करते हैं, तो इसका असर भविष्य के चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल झामुमो ने अपने तेवर स्पष्ट कर दिए हैं और कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश की है कि गठबंधन में सम्मानजनक भागीदारी और परामर्श की परंपरा को बनाए रखना आवश्यक है।

राज्यसभा चुनाव से पहले गठबंधन में दरार के संकेत, झामुमो ने कांग्रेस को घेरा राज्यसभा चुनाव से पहले गठबंधन में दरार के संकेत, झामुमो ने कांग्रेस को घेरा Reviewed by PSA Live News on 9:53:00 pm Rating: 5

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