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NEET में 40 लाख का खेल! बिहार के लखीसराय में मेडिकल छात्रों ने रची साजिश, दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने का बड़ा खुलासा


पटना/लखीसराय। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर बिहार के लखीसराय से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा (री-एग्जाम) के दौरान पुलिस और प्रशासन ने एक ऐसे कथित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया है, जिसने लाखों रुपये लेकर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाने की साजिश रची थी। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में मेडिकल कॉलेजों के छात्र, नर्सिंग छात्र और बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारी तक शामिल पाए गए हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों से मेडिकल कॉलेज में दाखिला सुनिश्चित कराने के नाम पर 30 से 40 लाख रुपये तक की डील की गई थी। आरोप है कि इस रकम के बदले प्रशिक्षित "सॉल्वर" या मेधावी छात्र परीक्षा केंद्रों पर वास्तविक उम्मीदवारों के स्थान पर बैठकर परीक्षा देने वाले थे। पुलिस का मानना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं को निशाना बनाता रहा है।

लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर जांच के दौरान नौ कथित डमी अभ्यर्थियों को पकड़ा गया, जो दूसरे उम्मीदवारों के नाम पर परीक्षा दे रहे थे। इसके बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ा और कुल 24 से 30 लोगों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया। इनमें कई मेडिकल छात्र, नर्सिंग छात्र तथा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े थे। रिपोर्टों के अनुसार, पटना मेडिकल कॉलेज, गया मेडिकल कॉलेज, AIIMS रायबरेली, बीएचयू तथा अन्य संस्थानों से जुड़े छात्रों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। पुलिस को शक है कि ये लोग "सॉल्वर" के रूप में काम कर रहे थे या पूरे नेटवर्क के संचालन में उनकी भूमिका थी।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि जांच में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता भी सामने आई है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पुलिस ने कई कर्मचारियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया में किस प्रकार हेरफेर की गई।

जिला प्रशासन और पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई स्थानों पर छापेमारी की गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस रैकेट के तार बिहार के बाहर अन्य राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, मोबाइल डेटा और संपर्क सूत्रों की पड़ताल कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

यह मामला केवल एक परीक्षा में नकल या प्रतिरूपण का नहीं है, बल्कि देश की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है। जब डॉक्टर बनने की राह में करोड़ों छात्रों की मेहनत दांव पर लगी हो, तब इस तरह के संगठित रैकेट प्रतिभाशाली और ईमानदार छात्रों के भविष्य पर सीधा हमला हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

लखीसराय का यह खुलासा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि शिक्षा माफिया और सॉल्वर गैंग लगातार नई तकनीकों और नए तरीकों से परीक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अब देश की निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाएं।

NEET में 40 लाख का खेल! बिहार के लखीसराय में मेडिकल छात्रों ने रची साजिश, दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने का बड़ा खुलासा NEET में 40 लाख का खेल! बिहार के लखीसराय में मेडिकल छात्रों ने रची साजिश, दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने का बड़ा खुलासा Reviewed by PSA Live News on 10:44:00 pm Rating: 5

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