रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र, चौधरी बगान, हरमू रोड में मंगलवार को राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों के समाज के प्रति अमूल्य योगदान, उनकी समर्पित सेवाओं तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की गई। इस अवसर पर आध्यात्मिकता और स्वास्थ्य के गहरे संबंध पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि डॉक्टर्स डे केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि उन चिकित्सकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है जो दिन-रात मानवता की सेवा में समर्पित रहते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर न केवल रोगों का उपचार करते हैं, बल्कि संकट और पीड़ा के समय मरीजों तथा उनके परिजनों के लिए आशा और विश्वास का आधार भी बनते हैं।
निर्मला बहन ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी और तनावपूर्ण जीवन में आध्यात्मिकता समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। विशेष रूप से चिकित्सकों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे लगातार मानसिक दबाव, जिम्मेदारियों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हैं। आध्यात्मिक अभ्यास उन्हें मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिससे वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन अधिक प्रभावी ढंग से कर पाते हैं।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता व्यक्ति को जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना करने की शक्ति देती है तथा कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित रहने की कला सिखाती है। नियमित आध्यात्मिक अभ्यास से व्यक्ति की दर्द सहने की क्षमता बढ़ती है और वह जीवन की समस्याओं का समाधान अधिक सहजता से खोज पाता है। उन्होंने कहा कि "यदि आध्यात्मिकता आपको बेहतर इंसान नहीं बना सकती, तो कम से कम आपको बुरा बनने से अवश्य रोक सकती है।"
अपने संबोधन में उन्होंने मानव मूल्यों और निःस्वार्थ प्रेम के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता हमें बिना किसी भेदभाव, पूर्वाग्रह, घृणा अथवा पक्षपात के सभी लोगों के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव रखना सिखाती है। जब व्यक्ति के भीतर करुणा, सहानुभूति और सेवा की भावना विकसित होती है, तभी वह समाज के लिए वास्तविक योगदान दे सकता है।
निर्मला बहन ने कहा कि वर्तमान समय की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए राजयोग ध्यान एक प्रभावी माध्यम है। राजयोग का नियमित अभ्यास व्यक्ति को आत्मिक शक्ति प्रदान करता है, जिससे वह नकारात्मक विचारों, तनाव और चिंता पर विजय प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने चिकित्सकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम का समापन सभी चिकित्सकों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर सेवा भावना की कामना के साथ किया गया।
Reviewed by PSA Live News
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9:28:00 pm
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