उद्यास्तमन सेवा, महाभिषेक एवं भव्यातिभव्य श्रृंगार के साथ सनातन परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुए विविध धार्मिक अनुष्ठान, भगवान वेंकटेश्वर का कराया गया शयन
राँची । राँची के रातू रोड स्थित रानी सती मंदिर लेन में अवस्थित प्रसिद्ध दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर (श्री तिरुपति बालाजी मंदिर) में शनिवार को श्रीहरिशयनी एकादशी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर वैदिक एवं आगमोक्त परंपराओं के अनुसार दिनभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। इसी के साथ सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण चातुर्मास व्रत का भी विधिवत शुभारंभ हुआ।
मंदिर परिसर प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहा। सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री वेंकटेश्वर, माता महालक्ष्मी एवं भूमिदेवी के दर्शन कर सुख-समृद्धि, आरोग्य, दीर्घायु, शांति एवं मोक्ष की कामना की।
इस अवसर पर सनातन परमात्मा श्रीहरि वेंकटेश्वर, श्रीश्रीदेवी-भूमिदेवी, चक्रराज सुदर्शन तथा भगवान की चरण पादुका (शठकोप जी) का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य महाभिषेक सम्पन्न कराया गया। दूध, दधि, शहद, डाभयुक्त जल, गंगा एवं गंडकी के पवित्र जल से अभिषेक के बाद हरिद्रा चूर्ण का उबटन, सुगंधित चंदन का अनुलेपन तथा शंखधारा, चक्रधारा, कुंभधारा एवं सहस्त्रधारा से दिव्य अभिषेक किया गया। मंदिर परिसर घंटा-घड़ियाल, शंखनाद एवं वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि से भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित हो गया।
महाभिषेक के पश्चात सभी प्रतिष्ठित विग्रहों को धूप, दीप, अगरू एवं सुगंधित द्रव्यों से सुवासित कर रेशमी वस्त्रों एवं आकर्षक आभूषणों से अलंकृत किया गया। रजनीगंधा एवं गुलाब के पुष्पों की सुगंधित मालाओं से भगवान का भव्यातिभव्य पुष्प-श्रृंगार किया गया, जिसने मंदिर की दिव्यता को और अधिक अलौकिक बना दिया।
इसके बाद भगवान को विविध फलाहारी व्यंजनों का बालभोग अर्पित किया गया तथा नक्षत्र आरती, कुंभ आरती एवं कर्पूर महाआरती संपन्न हुई। सुश्राव्य वेदपाठ एवं महास्तुति के साथ समस्त विश्व के कल्याण, सुख, शांति एवं धर्म की रक्षा की प्रार्थना की गई।
श्रद्धालुओं ने भगवान श्री वेंकटेश्वर की तुलसी अर्चना, माता महालक्ष्मी की कुंकुम अर्चना तथा श्रीविष्णु सहस्त्रनाम अर्चना कराकर अपने एवं परिवार की मंगलकामना की। मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि हरिशयनी एकादशी के पुण्य अवसर पर भगवान श्रीहरि की उपासना करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
इस विशेष आयोजन में उद्यास्तमन सेवा सहित महाभिषेक के यजमान के रूप में श्री पुलक सिंघानिया एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती आयुषी सिंघानिया (राँची) ने सेवा अर्पित की। फलाहारी महाभोग की सेवा श्री अजित जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती बबीता कुमारी (राँची) द्वारा सम्पन्न कराई गई, जबकि भव्य पुष्प-श्रृंगार सेवा श्री अमरेश कुमार गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ऊषा गुप्ता (लातेहार) द्वारा समर्पित की गई।
मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी ने समस्त वैदिक अनुष्ठानों का विधिवत संचालन किया। रात्रि में भगवान श्रीहरि को परंपरानुसार मधुर लोरी सुनाकर शयन कराया गया। तत्पश्चात शयन आरती, त्रुटि-क्षमा प्रार्थना एवं मंगलाशासन के साथ दिनभर का धार्मिक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से राम अवतार नरसरिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नरसरिया, रंजन सिंह, राजेश सुलतानिया, सुशील लोहिया, रामवृक्ष साहू, भोला वर्णवाल, शम्भुनाथ मिश्र, सुशील गाड़ोदिया, दीपू श्रीवास्तव, अमिताभ कात्यायल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे। पूरे दिन मंदिर परिसर "गोविंदा-गोविंदा" एवं वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा और श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सनातन संस्कृति की जीवंत अनुभूति का अनुपम अवसर बताया।
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7:57:00 pm
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