श्रीहरिशयनी एकादशी आज: योगनिद्रा में जाएंगे भगवान श्रीहरि, श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठानों की धूम
रांची, 24 जुलाई 2026। रातू रोड स्थित दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर (श्री तिरुपति बालाजी) में शनिवार, 25 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की श्रीहरिशयनी एकादशी श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के अनुरूप धूमधाम से मनाई जाएगी। इस पावन अवसर के साथ ही सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण चातुर्मास व्रत का शुभारंभ भी होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में शयन करते हैं। इस अवधि में विवाह, गृहप्रवेश सहित अनेक मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं तथा साधना, जप, तप, दान, व्रत एवं धर्माचरण का विशेष महत्व माना गया है।
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि शास्त्रों में वर्णित है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक प्रत्येक व्यक्ति को संयमित जीवन, सात्विक आहार, धार्मिक अनुष्ठान, सेवा, दान एवं भगवान श्रीहरि की आराधना में समय व्यतीत करना चाहिए। चातुर्मास आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और धार्मिक अनुशासन का विशेष काल माना गया है।
एकादशी महोत्सव के पूर्व शुक्रवार को दशमी तिथि के अवसर पर मंदिर में भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य महाभिषेक संपन्न कराया गया। इस दौरान भगवान का पंचामृत, पवित्र जल एवं विभिन्न दिव्य द्रव्यों से अभिषेक किया गया। तत्पश्चात भगवान को खीर, पोंगल, ताजे फल एवं मेवों का विशेष भोग अर्पित किया गया। इस पावन अभिषेक के यजमान रांची निवासी श्री अनीश अग्रवाल एवं श्रीमती सोनिया अग्रवाल रहे, जिन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
शनिवार को श्रीहरिशयनी एकादशी के अवसर पर मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इस दिन उद्यास्तमन सेवा, महाभिषेक, विशेष अर्चना, विष्णु सहस्रनाम पाठ, दिव्य आराधना, प्रसाद वितरण एवं अन्य वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा तथा भक्तों को भगवान श्रीहरि के शयन उत्सव के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा।
मंदिर के आचार्यों ने बताया कि श्रीहरिशयनी एकादशी का व्रत समस्त एकादशियों में अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन श्रद्धापूर्वक उपवास, भगवान विष्णु का पूजन, तुलसी अर्चन, विष्णु सहस्रनाम का पाठ एवं रात्रि जागरण करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
मंदिर प्रबंधन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परिवार सहित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर पहुंचकर श्रीहरिशयनी एकादशी के पावन उत्सव में सहभागी बनें, भगवान श्रीहरि के दिव्य दर्शन करें तथा चातुर्मास के शुभारंभ पर धर्म, संयम और भक्ति के इस महापर्व का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
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10:44:00 pm
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