योगिनी एकादशी पर श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान, श्रीवैष्णव परंपरा के अनुसार शनिवार को रखा जाएगा व्रत
रांची, 10 जुलाई 2026। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की पावन योगिनी एकादशी के अवसर पर राँची के रातू रोड स्थित रानी सती मंदिर लेन में अवस्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (श्री तिरुपति बालाजी) मंदिर में शनिवार, 11 जुलाई 2026 को श्रीवैष्णव परंपरा के अनुसार एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर मंदिर में भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर स्वामी एवं श्रीपद्मावती अम्मावरु के श्रीचरणों में विशेष पूजन, अर्चन एवं वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।
मंदिर प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, योगिनी एकादशी को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी एवं पापों का नाश करने वाली एकादशी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में इसका विशेष महत्व वर्णित है। मान्यता है कि यह व्रत मनुष्य को पापों से मुक्ति प्रदान कर धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसे संसार रूपी भवसागर से पार लगाने वाली दिव्य नौका की संज्ञा भी दी गई है।
इस पावन अवसर पर प्रातःकाल भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का विशेष सुप्रभात सेवा, वंदन, तिरूवाराधनम्, अभिषेक, पूजन, अर्चन एवं नित्याराधना संपन्न होगी। इसके उपरांत भगवान को विशेष भोग अर्पित कर आरती एवं स्तुति की जाएगी। श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन एवं पूजा-अर्चना का अवसर प्रदान करने के लिए मंदिर के पट प्रातः 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक तथा सायं 4:00 बजे से 7:00 बजे तक खुले रहेंगे।
मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के दर्शन करने तथा योगिनी एकादशी के पुण्य का लाभ प्राप्त करने की अपील की है।
प्रेस विज्ञप्ति में शास्त्रीय मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि दशमी तिथि से वेध युक्त एकादशी का व्रत नहीं करना चाहिए। धर्मशास्त्रों के अनुसार यदि एकादशी तिथि पूर्ण दिन एवं रात्रि तक रहे तथा उसका कुछ भाग अगले दिन प्रातःकाल तक विद्यमान हो, तो द्वादशी युक्त एकादशी के दिन ही उपवास करना श्रेष्ठ एवं शास्त्रसम्मत माना गया है। ऐसी मान्यता है कि तिथि-विधान की उपेक्षा कर किया गया व्रत अपेक्षित धार्मिक फल प्रदान नहीं करता। इसलिए श्रद्धालुओं को पंचांग एवं श्रीवैष्णव परंपरा के अनुसार निर्धारित तिथि पर ही व्रत एवं पूजा-अर्चना करने की सलाह दी गई है।
योगिनी एकादशी के इस पावन पर्व पर मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण रहेगा। वैदिक मंत्रोच्चार, विष्णु सहस्रनाम, दिव्य स्तोत्रों के पाठ तथा भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की विशेष आराधना से मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्ति रस से सराबोर रहेगा। मंदिर प्रबंधन ने सभी श्रद्धालुओं से इस पुण्य अवसर पर उपस्थित होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया है।
Reviewed by PSA Live News
on
10:27:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: