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राष्ट्र सर्वोपरि, आंदोलन की आड़ में देश विरोध और महिलाओं से दुर्व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं : सर्व जन विकास पार्टी

जंतर-मंतर की घटनाओं पर सर्व जन विकास पार्टी ने जताई कड़ी आपत्ति, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग


रांची/नई दिल्ली। 
सर्व जन विकास पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान सामने आए घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आंदोलन में शामिल उन लोगों और उनका समर्थन करने वालों को आड़े हाथों लिया है, जिन पर देश विरोधी नारे लगाने, सुरक्षा बलों के साथ हिंसक व्यवहार करने तथा एक महिला पत्रकार के साथ कथित छेड़छाड़ और अभद्रता करने के आरोप लग रहे हैं। पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी भी आंदोलन को राष्ट्रविरोध, हिंसा और महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।

सर्व जन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने जारी बयान में कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने, सरकार की नीतियों का विरोध करने और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने का अधिकार देता है। किसी भी सरकार की नीतियों से मतभेद होना लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। विपक्ष, सामाजिक संगठन और आम नागरिक सरकार के निर्णयों की आलोचना कर सकते हैं, उनसे असहमत हो सकते हैं और शांतिपूर्ण आंदोलन भी कर सकते हैं। लेकिन सरकार और राष्ट्र को एक मान लेना या सरकार के विरोध के नाम पर राष्ट्र के खिलाफ खड़ा होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र सर्वोपरि है। सरकारें आती-जाती रहती हैं, राजनीतिक दल बदलते रहते हैं, सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यदि किसी आंदोलन में देश विरोधी नारे लगाए जाते हैं या ऐसी गतिविधियां होती हैं जो राष्ट्र की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, तो सर्व जन विकास पार्टी ऐसे किसी भी कृत्य का समर्थन कभी नहीं कर सकती।

अशोक कुमार झा ने कहा कि उनकी पार्टी स्वयं अनेक राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर सरकार से असहमति रखती है और समय-समय पर लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध भी दर्ज कराती रही है। चाहे वह भ्रष्टाचार का मुद्दा हो, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, शिक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक लापरवाही—सर्व जन विकास पार्टी ने हमेशा जनता की आवाज बुलंद की है। लेकिन पार्टी का स्पष्ट सिद्धांत है कि विरोध संविधान की मर्यादा में होना चाहिए। आंदोलन की आड़ में राष्ट्र विरोध, हिंसा, अराजकता या महिलाओं के सम्मान पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि यदि जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार के साथ कथित छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार की घटना की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल पत्रकारिता पर हमला होगा, बल्कि पूरे समाज और महिला सम्मान पर भी गंभीर आघात होगा। एक महिला पत्रकार वहां किसी संगठन का हिस्सा बनकर नहीं, बल्कि अपना पेशेवर दायित्व निभाने जाती है। समाचारों को जनता तक पहुंचाना उसका संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायित्व है। यदि पत्रकारों को ही डराया, धमकाया या उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाएगा, तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कमजोर होगा।

उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल भाषणों और नारों से नहीं, बल्कि व्यवहार से सिद्ध होता है। जो लोग महिला सुरक्षा और महिला अधिकारों की बातें करते हैं, यदि वही किसी महिला पत्रकार के साथ अभद्रता करते हैं, तो यह दोहरा चरित्र और समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। ऐसे लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति आंदोलन की आड़ में इस प्रकार की हरकत करने का साहस न कर सके।

सर्व जन विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों पर कथित पत्थरबाजी और हिंसा की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि देश के जवान और सुरक्षाकर्मी किसी राजनीतिक दल के कर्मचारी नहीं होते, बल्कि वे पूरे राष्ट्र के प्रहरी होते हैं। वे अपने परिवारों से दूर रहकर दिन-रात देशवासियों की सुरक्षा में लगे रहते हैं। ऐसे जवानों पर हमला करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। लोकतांत्रिक आंदोलन का अर्थ सुरक्षा बलों पर हमला करना या कानून व्यवस्था को चुनौती देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि जो लोग आंदोलन के नाम पर हिंसा, अराजकता, सरकारी संपत्ति को नुकसान, महिलाओं से दुर्व्यवहार और सुरक्षाबलों पर हमला करते हैं, उन्हें छात्र आंदोलनकारी कहना वास्तविक छात्र आंदोलन का अपमान होगा। छात्र आंदोलन हमेशा विचार, वैचारिक संघर्ष, सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक रहा है। इसे गुंडागर्दी, हिंसा और अराजकता से जोड़ना देश के लाखों ईमानदार छात्रों का अपमान है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि यदि आज की युवा पीढ़ी जानना चाहती है कि वास्तविक छात्र आंदोलन क्या होता है, तो उसे लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के आंदोलन के इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। जेपी आंदोलन ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नैतिक राजनीति, अनुशासन, सामाजिक परिवर्तन और जनभागीदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया था। वहां राष्ट्र सर्वोपरि था, संविधान का सम्मान था और समाज को जोड़ने की भावना थी। आज आवश्यकता उसी आदर्श को अपनाने की है, न कि आंदोलन के नाम पर हिंसा और राष्ट्रविरोध को बढ़ावा देने की।

उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी राजनीतिक दल, छात्र संगठन या अन्य संगठन इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल हो, सर्व जन विकास पार्टी उसका समर्थन नहीं करेगी। पार्टी का मानना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और किसी भी दोषी के विरुद्ध बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

अंत में सर्व जन विकास पार्टी ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण की सकारात्मक भूमिका निभाएं, लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करें, महिलाओं की गरिमा की रक्षा करें और संविधान की मर्यादा में रहकर अपनी आवाज बुलंद करें। पार्टी ने दोहराया कि सरकार का विरोध लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन राष्ट्र का विरोध कभी भी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं हो सकता। राष्ट्र सर्वोपरि है और रहेगा।

राष्ट्र सर्वोपरि, आंदोलन की आड़ में देश विरोध और महिलाओं से दुर्व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं : सर्व जन विकास पार्टी राष्ट्र सर्वोपरि, आंदोलन की आड़ में देश विरोध और महिलाओं से दुर्व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं : सर्व जन विकास पार्टी Reviewed by PSA Live News on 7:18:00 pm Rating: 5

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