लेखक : अशोक कुमार झा।
दिल्ली का जंतर-मंतर वर्षों से लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों का प्रतीक रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी मांगों, अधिकारों और असंतोष को व्यक्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। किंतु समय के साथ यह प्रश्न भी उठने लगा है कि क्या हर आंदोलन वास्तव में जनहित के लिए होता है, अथवा कुछ आंदोलन ऐसे भी हैं जिनमें युवाओं की भावनाओं, ऊर्जा और आदर्शवाद का उपयोग राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है?
आज महानगरों का जीवन पहले की तुलना में पूरी तरह बदल चुका है। माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं, जीवन की गति तेज है, प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और बच्चों के साथ बिताया जाने वाला समय लगातार कम होता जा रहा है। आर्थिक समृद्धि बढ़ी है, लेकिन भावनात्मक संवाद कमजोर हुआ है। परिणामस्वरूप अनेक युवा अपने परिवार की अपेक्षा सोशल मीडिया, ऑनलाइन समूहों, कॉलेज के मित्रों और वैचारिक संगठनों से अधिक प्रभावित होने लगे हैं। यह परिवर्तन केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों में देखने को मिला है।
युवाओं में सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता अपने आप में नकारात्मक नहीं है। लोकतंत्र में नई पीढ़ी का सवाल पूछना, व्यवस्था पर चर्चा करना और सामाजिक मुद्दों पर भागीदारी निभाना आवश्यक है। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब किसी भी विचारधारा के नाम पर युवाओं को परिवार, समाज और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों से पूरी तरह काट देने की मानसिकता विकसित होने लगे। यदि कोई संगठन, समूह या वैचारिक मंच युवाओं को यह विश्वास दिलाने लगे कि परिवार, माता-पिता और सामाजिक संबंध महत्वहीन हैं तथा केवल आंदोलन ही जीवन का उद्देश्य है, तो यह चिंता का विषय अवश्य है।
इसी प्रकार महानगरों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, वेप, मादक पदार्थों और डिजिटल लत जैसी समस्याएं भी समाज के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभरी हैं। इन समस्याओं का संबंध केवल किसी एक विचारधारा या संगठन से जोड़ना उचित नहीं होगा। इनके पीछे कई कारण हैं—साथियों का दबाव, मानसिक तनाव, अकेलापन, पारिवारिक संवाद की कमी, इंटरनेट का प्रभाव और आसान उपलब्धता। इन चुनौतियों का समाधान परिवार, विद्यालय, समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही संभव है।
भारतीय समाज की सबसे बड़ी शक्ति सदियों से परिवार की संस्था रही है। संयुक्त परिवार भले कम हो गए हों, लेकिन माता-पिता के प्रति सम्मान, बुजुर्गों की सेवा और पारिवारिक जिम्मेदारियों का मूल्य आज भी भारतीय संस्कृति की पहचान है। आधुनिकता और करियर की दौड़ में यदि यह भाव कमजोर पड़ता है तो भविष्य में सामाजिक अकेलापन और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक जीवन और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाया जाए।
जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलनों को भी इसी दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। हर आंदोलन का उद्देश्य, नेतृत्व, वित्तीय स्रोत, मांगें और कार्यशैली सार्वजनिक विमर्श का विषय होना चाहिए। किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन की पारदर्शिता उतनी ही आवश्यक है जितनी उसकी वैधता। युवाओं को भी किसी आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके तथ्य, उद्देश्य और संभावित परिणामों को समझना चाहिए, न कि केवल भावनात्मक नारों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा, उसकी निजी पहचान, यौन अभिविन्यास या वैचारिक मतभेद के आधार पर उसके चरित्र का आकलन न किया जाए। समाज में विभिन्न विचारों के लिए स्थान होना लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। असहमति का उत्तर तथ्यों, तर्कों और संवाद से दिया जाना चाहिए, न कि पूर्वाग्रह या सामान्यीकरण से।
आज सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि युवा किस विचारधारा से प्रभावित हैं, बल्कि यह है कि क्या वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बन रहे हैं? क्या वे अपने माता-पिता के साथ संवाद बनाए रख रहे हैं? क्या वे नशे, हिंसा और कट्टरता से दूर रहकर रचनात्मक भूमिका निभा रहे हैं? यदि इन प्रश्नों का उत्तर सकारात्मक है, तो समाज का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
भारत की शक्ति केवल उसकी अर्थव्यवस्था या राजनीति नहीं, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक रिश्ते और सांस्कृतिक मूल्य भी हैं। इसलिए आवश्यक है कि माता-पिता अपने बच्चों को केवल बेहतर शिक्षा और सुविधाएं ही नहीं, बल्कि समय, संवाद, संस्कार और जिम्मेदारी का भाव भी दें। साथ ही युवाओं को भी यह समझना होगा कि किसी भी आंदोलन, विचारधारा या सामाजिक अभियान से जुड़ने से पहले विवेक, तथ्य और परिवार के प्रति अपने दायित्वों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
लोकतंत्र में आंदोलन आवश्यक हैं, लेकिन परिवार भी उतना ही आवश्यक है। अधिकारों की लड़ाई महत्वपूर्ण है, किंतु कर्तव्यों की उपेक्षा किसी भी समाज को कमजोर बना सकती है। यही वह संतुलन है जिसे भारत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना होगा।
Reviewed by PSA Live News
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11:29:00 pm
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