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भरत तिवारी की मुहिम का असर: बिलौटी गांव पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी, तेज़ी से शुरू हुई मिट्टी भराई

विस्थापित परिवारों के पुनर्वास स्थल को लेकर लंबे समय से उठा रहे थे आवाज़, गड्ढेनुमा जमीन पर बसाने का कर रहे थे विरोध


आरा/जगदीशपुर। 
जगदीशपुर प्रखंड क्षेत्र के बिलौटी गांव में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब प्रशासन सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से पुनर्वास स्थल की स्थिति को लेकर आवाज़ उठा रहे भरत तिवारी की पहल के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है और वहां तेजी से मिट्टी भराई का कार्य शुरू करा दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, जवइनियां गांव से विस्थापित होकर आए परिवारों को बिलौटी गांव में बसाने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि जिस भूमि पर इन परिवारों को बसाया जा रहा था, उसकी स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और विस्थापित परिवारों में गंभीर चिंता थी। सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी लगातार यह मुद्दा उठा रहे थे कि पुनर्वास के लिए चयनित जमीन समतल नहीं है, बल्कि गड्ढेनुमा क्षेत्र है, जहां बरसात के दिनों में पानी भर जाने की पूरी संभावना है। उनका कहना था कि यदि बिना समुचित भराई और समतलीकरण के लोगों को वहां बसाया गया तो भविष्य में उन्हें जलजमाव, बीमारियों और अन्य अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

भरत तिवारी ने इस मामले को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया था। उन्होंने जगदीशपुर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के समक्ष भी अपनी आपत्ति और मांग रखी थी। उनका आग्रह था कि पुनर्वास से पहले जमीन की स्थिति को सुधारना आवश्यक है ताकि विस्थापित परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवासीय वातावरण मिल सके। हालांकि उस समय उनकी मांगों पर कोई विशेष कार्रवाई होती नहीं दिखाई दी और उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया।

लेकिन हाल के दिनों में मामले ने तूल पकड़ा और स्थानीय स्तर पर बढ़ते दबाव के बाद प्रशासनिक अमला बिलौटी गांव पहुंचा। अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण के बाद यह स्वीकार किया गया कि जमीन के कुछ हिस्सों में समुचित भराई की आवश्यकता है। इसके बाद प्रशासन की ओर से युद्धस्तर पर मिट्टी भराई का कार्य शुरू कराया गया। वर्तमान में कई स्थानों पर जेसीबी और ट्रैक्टरों की मदद से मिट्टी डालकर भूमि को ऊंचा और समतल बनाने का कार्य किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह कार्य नहीं कराया जाता तो बरसात के मौसम में विस्थापित परिवारों के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता था। ग्रामीणों का मानना है कि लगातार संघर्ष और जनहित के मुद्दे को मजबूती से उठाने के कारण ही प्रशासन को इस दिशा में पहल करनी पड़ी है।

भरत तिवारी ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि उन गरीब और विस्थापित परिवारों के अधिकारों के लिए है, जिन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास केवल जमीन का आवंटन भर नहीं है, बल्कि लोगों को रहने योग्य वातावरण उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मिट्टी भराई और समतलीकरण का कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न न हो।

इस घटनाक्रम के बाद विस्थापित परिवारों में भी राहत की भावना देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन शुरू से ही जमीनी हकीकत को गंभीरता से लेता तो इतनी लंबी प्रतीक्षा और संघर्ष की आवश्यकता नहीं पड़ती। फिलहाल मिट्टी भराई का कार्य जारी है और स्थानीय लोग इसकी गुणवत्ता एवं गति पर नजर बनाए हुए हैं।

बिलौटी गांव का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि पुनर्वास योजनाओं को कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लागू किया जाना चाहिए, ताकि विस्थापित परिवारों को नई जगह पर भी सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अवसर मिल सके।

भरत तिवारी की मुहिम का असर: बिलौटी गांव पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी, तेज़ी से शुरू हुई मिट्टी भराई भरत तिवारी की मुहिम का असर: बिलौटी गांव पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी, तेज़ी से शुरू हुई मिट्टी भराई Reviewed by PSA Live News on 12:46:00 pm Rating: 5

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