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मौन घातक उच्च रक्तचाप: बदलती जीवनशैली के बीच बढ़ता स्वास्थ्य संकट

 


✍️ संकलन एवं संपादन:

              सुजीत कुमार मिश्र

             (सहायक प्राध्यापक)

  संदीप विश्वविद्यालय, सिजौल, मधुबनी (बिहार)


 समय रहते संभले समाज, तभी बचेगा जीवन

           आज जब विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है, तब भी एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी शोर-शराबे के करोड़ों लोगों के जीवन को संकट में डाल रही है। यह बीमारी है उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure/Hypertension), जिसे चिकित्सा विज्ञान में उचित ही "Silent Killer" (मौन घातक) कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अधिकांश रोगियों को वर्षों तक इसका कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता, किंतु इस दौरान यह हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे, आंखों तथा रक्त वाहिकाओं को धीरे-धीरे गंभीर क्षति पहुंचाता रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस ने उच्च रक्तचाप को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा है कि इसकी समय पर पहचान और प्रभावी नियंत्रण से प्रतिवर्ष लाखों लोगों की अकाल मृत्यु रोकी जा सकती है। WHO की 2023 की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में लगभग 1.28 अरब वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, किंतु उनमें से लगभग आधे लोगों को यह ज्ञात ही नहीं है कि वे इस बीमारी से ग्रस्त हैं।

     भारत की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) तथा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि पहले जहां उच्च रक्तचाप को वृद्धावस्था की बीमारी माना जाता था, वहीं अब 25-40 वर्ष की आयु के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अनियमित दिनचर्या, मानसिक तनाव, फास्ट फूड, अत्यधिक नमक का सेवन, मोटापा, धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण बन चुके हैं। विश्वविख्यात INTERSALT Study ने कई देशों में किए गए शोध के आधार पर स्पष्ट किया कि भोजन में अत्यधिक सोडियम (नमक) का सेवन रक्तचाप बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है। इसी प्रकार अमेरिका के प्रसिद्ध DASH (Dietary Approaches to Stop Hypertension) Trial ने प्रमाणित किया कि यदि भोजन में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, कम वसा वाले दुग्ध उत्पाद तथा सीमित नमक शामिल किया जाए, तो बिना अतिरिक्त दवा के भी रक्तचाप में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

हृदय रोगों पर दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले अध्ययनों में शामिल Framingham Heart Study ने यह सिद्ध किया कि अनियंत्रित उच्च रक्तचाप से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हृदय विफलता और समयपूर्व मृत्यु का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। वहीं वर्ष 2015 के SPRINT Trial ने यह दर्शाया कि जिन रोगियों का रक्तचाप वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नियंत्रित रखा गया, उनमें हृदय रोग और मृत्यु का खतरा उल्लेखनीय रूप से कम हुआ।

उच्च रक्तचाप केवल नमक अधिक खाने से ही नहीं होता। आधुनिक जीवनशैली भी इसकी बड़ी जिम्मेदार है। मानसिक तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे रक्त वाहिकाएं संकुचित होती हैं और रक्तचाप बढ़ने लगता है। लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम का अभाव, पर्याप्त नींद न लेना, मोटापा, धूम्रपान तथा अत्यधिक शराब का सेवन इस समस्या को और गंभीर बना देते हैं।

     विश्वप्रसिद्ध हाइपरटेंशन विशेषज्ञ डॉ. नॉर्मन एम. कपलान का कथन है कि "उच्च रक्तचाप जीवनभर साथ रहने वाली ऐसी स्थिति है, जिसके लिए जीवनभर सतर्कता आवश्यक है।" वहीं कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. फ्रांज एच. मेसरली का मानना है कि यदि उच्च रक्तचाप का समय पर उपचार किया जाए तो स्ट्रोक और हृदयाघात के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। रक्तचाप संबंधी अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. पॉल के. व्हेल्टन भी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि "दवा महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली उससे भी अधिक प्रभावशाली औषधि है।"

चिंता का विषय यह भी है कि हमारे समाज में अधिकांश लोग तब तक चिकित्सक के पास नहीं जाते, जब तक कोई गंभीर समस्या सामने न आ जाए। जबकि उच्च रक्तचाप का पता केवल नियमित जांच से ही लगाया जा सकता है। विशेष रूप से जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग या उच्च रक्तचाप का इतिहास है, जिन्हें मधुमेह, मोटापा या किडनी की बीमारी है अथवा जिनकी आयु 40 वर्ष से अधिक है, उन्हें नियमित रक्तचाप जांच करानी चाहिए। चिकित्सकों के अनुसार रक्तचाप नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय दवा और अनुशासित जीवनशैली का संतुलित समन्वय है। प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट पैदल चलना, योग एवं ध्यान करना, नमक की मात्रा सीमित रखना, ताजे फल एवं हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना तथा चिकित्सक द्वारा दी गई दवाओं का नियमित सेवन - ये सभी उपाय मिलकर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होते हैं।

आज आवश्यकता केवल चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता की सामाजिक संस्कृति विकसित करने की है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, उद्योगों और ग्रामीण समुदायों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, रक्तचाप जांच शिविर तथा स्वस्थ जीवनशैली संबंधी जनजागरण अभियान समय की मांग हैं। यदि हम अभी नहीं चेते, तो आने वाले वर्षों में उच्च रक्तचाप भारत के लिए और भी बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। अंततः यह समझना होगा कि उच्च रक्तचाप कोई साधारण रोग नहीं, बल्कि अनेक घातक बीमारियों का प्रवेश द्वार है। इसका उपचार केवल अस्पतालों में नहीं, बल्कि हमारे घरों, भोजन की थाली, दिनचर्या, सोच और जीवनशैली में छिपा है। यदि समाज समय रहते जागरूक हो जाए तो लाखों लोगों को हृदयाघात, पक्षाघात और असमय मृत्यु से बचाया जा सकता है। यही स्वस्थ भारत की दिशा में सबसे सार्थक कदम होगा।

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2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर जानकारी है वास्तव में इसके लिए जागरूक होना आज का मांग है । स्कूलों में कॉलेज में एवं विश्वविद्यालय में इससे संबंधित जागरूकता अभियान चलाना भी अनिवार्य है । लेख आज के परिपेक्ष में प्रासंगिक है ।
    मैं आशा करता हूं कि इस तरह का लेख और भी आता रहेगा जोकि मानव कल्याण की दिशा में एक सार्थक कदम होगा ।

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  2. चिकित्सा विज्ञान ने दवाइयां तो बना ली हैं, लेकिन जब तक हम अपनी जीवनशैली नहीं बदलेंगे, तब तक दवाइयां भी एक सीमा तक ही काम करेंगी। आज समाज में:
    ​तनाव और अस्वास्थ्यकर खानपान: प्रसंस्कृत भोजन , अत्यधिक नमक, डिब्बाबंद खाना और भागदौड़ भरी जिंदगी ने इसे घर-घर पहुंचा दिया है। मानसिक तनाव शारीरिक बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है। तनाव मुक्त वातावरण बनाना हम सबकी जिम्मेदारी

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