“सखी वार्ता” बनी महिला सशक्तिकरण का सशक्त मंच, ग्रामीण महिलाओं ने जानी अपने अधिकारों और योजनाओं की जानकारी
मधुबनी, 03 जुलाई 2026। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और किशोरियों को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में महिला एवं बाल विकास निगम, मधुबनी द्वारा आयोजित “सखी वार्ता” कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। राजनगर प्रखंड के समेकित बाल विकास सेवाओं के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-192 के पोषक क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं, किशोरियों, युवाओं तथा स्थानीय समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, वित्तीय सशक्तिकरण तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।
कार्यक्रम में वन स्टॉप सेंटर (OSC), जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन (DHEW), मधुबनी तथा विभा शंकर फाउंडेशन के पदाधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने महिलाओं से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुना और समाधान संबंधी जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने घरेलू हिंसा, बाल विवाह, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से जवाब दिया गया।
महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण पर दिया गया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन (DHEW), मधुबनी के जिला मिशन समन्वयक (DMC) ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक व्यापक प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब महिलाओं को उनके बारे में सही जानकारी हो।
उन्होंने पंचायत स्तर पर आयोजित किए जाने वाले “सहयोग शिविरों” की जानकारी देते हुए कहा कि इन शिविरों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग, जीविका, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा कौशल विकास से संबंधित अनेक योजनाओं का लाभ ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचाया जा रहा है।
महिला हिंसा, दहेज और बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान
कार्यक्रम के दौरान DHEW के लैंगिक विशेषज्ञ शिव राम मेहरा ने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों और सामाजिक कुरीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए महिलाओं का जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने महिलाओं को घरेलू हिंसा अधिनियम, दहेज निषेध कानून, बाल विवाह निषेध अधिनियम तथा अन्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही बताया कि किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में महिलाएं वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और प्रशासनिक सहायता का लाभ लेकर न्याय प्राप्त कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं को कानूनी सहायता, मनोसामाजिक परामर्श, अस्थायी आश्रय, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास जैसी कई सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। महिलाओं से अपील की गई कि वे किसी भी प्रकार की प्रताड़ना को सहन करने के बजाय संबंधित संस्थाओं से सहायता प्राप्त करें।
स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण महिलाओं के स्वास्थ्य पर आयोजित विशेष सत्र रहा। विभा शंकर फाउंडेशन की संस्थापक एवं प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा झा ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी माहवारी स्वच्छता, प्रजनन स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जागरूकता की कमी देखी जाती है, जिसके कारण महिलाओं को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने महिलाओं को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने तथा नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी।
डॉ. झा ने एनीमिया, कैल्शियम की कमी, हड्डियों और घुटनों के दर्द, गर्भावस्था के दौरान देखभाल तथा किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है।
कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं ने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याएं साझा कीं, जिन पर डॉ. झा ने व्यक्तिगत परामर्श और काउंसलिंग प्रदान की। महिलाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों की अत्यंत आवश्यकता है।
वित्तीय साक्षरता और आत्मनिर्भरता पर दिया गया विशेष प्रशिक्षण
महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से DHEW की वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ पूनम कुमारी ने वित्तीय जागरूकता पर विशेष सत्र आयोजित किया। उन्होंने महिलाओं को बचत, बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान, सरकारी वित्तीय योजनाओं तथा स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिला न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। महिलाओं को बैंक खाते संचालित करने, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने, सरकारी ऋण योजनाओं का लाभ उठाने तथा नियमित बचत की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार महिलाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए कई प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रही है, जिसका लाभ उठाकर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव और समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और किशोरियों ने खुलकर अपनी समस्याओं, अनुभवों और सुझावों को साझा किया। कई महिलाओं ने घरेलू समस्याओं, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों तथा सरकारी योजनाओं तक पहुंच में आने वाली कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उन्हें अपने अधिकारों को समझने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। कई प्रतिभागियों ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की मांग की।
जागरूकता से सशक्तिकरण की ओर बढ़ता कदम
“सखी वार्ता” कार्यक्रम केवल एक जागरूकता अभियान नहीं बल्कि महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक व्यापक प्रयास के रूप में सामने आया। कार्यक्रम ने महिलाओं को यह संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें, शिक्षा और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएं तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सरकारी सहायता तंत्र का उपयोग करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम पंचायत स्तर पर नियमित रूप से आयोजित किए जाएं तो महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ समाज में लैंगिक समानता और महिला सम्मान की भावना को भी मजबूती मिलेगी। “सखी वार्ता” ने यह साबित किया कि जागरूकता ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है और इसी के माध्यम से एक मजबूत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है।
Reviewed by PSA Live News
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2:38:00 pm
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