ब्लॉग खोजें

सच्ची स्वतंत्रता भीतर के विकारों पर विजय पाने में है : ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन


राँची।
स्वतंत्रता दिवस के पूर्व आयोजित विशेष समारोह में ब्रह्माकुमारी संस्थान की केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश को बाहरी बंधनों से स्वतंत्रता मिल चुकी है, लेकिन आज आवश्यकता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने मन, बुद्धि और संस्कारों को भी विकारों के बंधन से मुक्त करे।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें केवल देश की आजादी का गौरवपूर्ण इतिहास ही याद नहीं दिलाता, बल्कि यह आत्मचिंतन का अवसर भी देता है कि क्या हम वास्तव में अपने भीतर से स्वतंत्र हैं। बाहरी नियम-कानूनों और पराधीनता से मुक्ति के बावजूद मनुष्य आज भी काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों से बंधा हुआ है। यही आंतरिक विकार व्यक्ति की शांति, प्रसन्नता और सकारात्मक सोच को प्रभावित करते हैं।

ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता केवल बाहरी परिस्थितियों को बदलने से प्राप्त नहीं होती। जब व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण प्राप्त करता है और अपने श्रेष्ठ संस्कारों को जागृत करता है, तभी वह वास्तविक स्वतंत्रता का अनुभव कर सकता है। उन्होंने कहा कि परमपिता परमात्मा ने मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वतंत्र बनने का सरल मार्ग बताया है—स्व को सम्मान देना, स्व को मान देना और स्वयं को सदैव अलर्ट रखना।

उन्होंने आत्मा के स्वरूप को समझाते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर ज्ञान, पवित्रता, शांति, प्रेम और शक्ति जैसे दिव्य गुण विद्यमान हैं। जब हम स्वयं को शरीर और बाहरी परिस्थितियों तक सीमित न मानकर आत्मिक स्वरूप में स्थित होते हैं, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश की सुरक्षा के लिए बाहरी शत्रुओं से सजग रहना आवश्यक है, उसी प्रकार जीवन में आंतरिक शत्रुओं के प्रति भी सतर्क रहना जरूरी है। क्रोध आने पर शांत रहना, लोभ के स्थान पर संतोष अपनाना, मोह के स्थान पर विवेक रखना और अहंकार के स्थान पर विनम्रता को जीवन में स्थान देना ही वास्तविक आत्म-विजय की दिशा में कदम है।

ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि यदि व्यक्ति प्रतिदिन अपने विचारों की निगरानी करे और यह जांचता रहे कि उसके मन में कौन-से विचार जन्म ले रहे हैं, तो वह धीरे-धीरे नकारात्मक संस्कारों पर विजय प्राप्त कर सकता है। आत्म-जागरूकता और परमात्मा की स्मृति मनुष्य को मानसिक तनाव, भय और नकारात्मकता से ऊपर उठाकर शांति एवं शक्ति का अनुभव कराती है।

उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी से आह्वान किया कि हम देश की स्वतंत्रता का उत्सव मनाने के साथ-साथ अपने भीतर के विकारों से स्वतंत्र होने का भी संकल्प लें। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने अंदर के दुश्मनों पर विजय प्राप्त करता है, तभी स्वतंत्रता का वास्तविक आनंद अनुभव किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बाहरी स्वतंत्रता हमें राष्ट्र के रूप में मजबूत बनाती है, जबकि आंतरिक स्वतंत्रता हमें व्यक्ति के रूप में सशक्त बनाती है। इसलिए इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने श्रेष्ठ विचारों, पवित्र कर्मों और सकारात्मक संस्कारों के माध्यम से स्वयं को मजबूत बनाएंगे तथा परमात्मा की शक्ति को जीवन का आधार बनाकर सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव करेंगे।

सच्ची स्वतंत्रता भीतर के विकारों पर विजय पाने में है : ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन सच्ची स्वतंत्रता भीतर के विकारों पर विजय पाने में है : ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन Reviewed by PSA Live News on 11:38:00 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.