ब्रह्माकुमारी संस्थान में मुख्यमंत्री ने कहा— रक्षाबंधन का पर्व रंगभेद, वर्गभेद, जाति और धर्म की सीमाओं से परे मानवता को जोड़ने वाला उत्सव
राँची। रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर राजधानी राँची स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बगान, हरमू रोड में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्थान की वरिष्ठ राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पवित्रता, विश्वास और आत्मिक सुरक्षा का प्रतीक रक्षा-सूत्र (राखी) बाँधकर उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं जनकल्याणकारी कार्यों की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक वातावरण में मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया तथा उन्हें ईश्वरीय सौगात एवं आध्यात्मिक संदेश भी भेंट किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने रक्षाबंधन पर्व के आध्यात्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विस्तृत चर्चा की।
ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मा और परमात्मा के पवित्र संबंध का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब संसार काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और अन्य विकारों से प्रभावित होकर अशांति और तनाव की ओर बढ़ता है, तब निराकार परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होकर मानवता को सत्य ज्ञान प्रदान करते हैं और आत्मिक जागृति का मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि वास्तविक रक्षाबंधन वह है, जब मनुष्य अपने भीतर की दिव्य शक्तियों को जागृत करते हुए परमात्मा से सच्चा संबंध स्थापित करता है। आत्मिक शक्ति के माध्यम से व्यक्ति अपने दुर्गुणों, नकारात्मक विचारों और विकारों पर विजय प्राप्त कर सकता है। यही आध्यात्मिक रक्षा-सूत्र जीवन को सुख, शांति, पवित्रता और सकारात्मकता की दिशा में अग्रसर करता है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति का ऐसा महान पर्व है, जो किसी भी प्रकार के जातीय, धार्मिक, वर्गीय अथवा सामाजिक भेदभाव को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का संदेश मानवता, विश्वास, प्रेम और परस्पर सम्मान का संदेश है। इस पर्व में कोई भी बहन किसी भी भाई की कलाई पर राखी बाँध सकती है और भाई उसे पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करता है। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व "वसुधैव कुटुम्बकम्" की महान भावना को साकार करता है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस पर्व के वास्तविक संदेश को आत्मसात कर ले, तो समाज में आपसी वैमनस्य, भेदभाव और कटुता स्वतः समाप्त हो जाएगी तथा प्रेम, भाईचारा, सामाजिक समरसता, शांति और खुशहाली का वातावरण स्थापित होगा।
उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की भी आवश्यकता है। ऐसे में ब्रह्माकुमारी संस्थान जैसी आध्यात्मिक संस्थाएँ लोगों में नैतिकता, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और मानवीय मूल्यों का विकास कर समाज को नई दिशा प्रदान कर रही हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने रक्षाबंधन के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने तथा सामाजिक सद्भाव, महिला सम्मान, पारिवारिक मूल्यों और आध्यात्मिक जीवन शैली को अपनाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेम, सौहार्द और भारतीय संस्कृति की गरिमा से ओतप्रोत रहा।
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9:53:00 pm
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