भक्ति, ज्ञान और प्रेम से सराबोर होगा रांची, 12 से 18 सितंबर तक अग्रसेन भवन में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव
रांची। सराफ परिवार के तत्वावधान में राजधानी रांची में भक्ति, ज्ञान और प्रेम के दिव्य संगम का सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। यह धार्मिक आयोजन 12 से 18 सितंबर 2026 तक महाराजा अग्रसेन भवन, सेवा सदन रोड, रांची में होगा। सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान कराएंगे।
आयोजन की जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से संध्या 6 बजे तक होगी। आयोजन को लेकर सराफ परिवार की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। सात दिनों तक श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों, भगवान के अवतारों, भक्तों के चरित्र तथा भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वर्णन किया जाएगा।
12 सितंबर को निकलेगी कलश यात्रा
कथा के प्रथम दिन 12 सितंबर, शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य तथा शुकदेव-परीक्षित मिलन का प्रसंग सुनाया जाएगा। इसी दिन प्रातः 10 बजे भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में शामिल होने की उम्मीद है।
सातों दिनों में होंगे विभिन्न धार्मिक प्रसंग
13 सितंबर, रविवार को वराह अवतार, कपिल चरित्र एवं सृष्टि वर्णन होगा।
14 सितंबर, सोमवार को वामन अवतार, प्रह्लाद चरित्र एवं अजामिल प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा।
15 सितंबर, मंगलवार को समुद्र मंथन, गजेन्द्र मोक्ष एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का मनोहारी प्रसंग होगा।
16 सितंबर, बुधवार को श्रीकृष्ण लीला, नंद महोत्सव, गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग का आयोजन किया जाएगा।
17 सितंबर, गुरुवार को महारास एवं रुक्मिणी विवाह की दिव्य कथा श्रद्धालुओं को सुनाई जाएगी।
18 सितंबर, शुक्रवार को सुदामा चरित्र एवं पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय कथा अमृत महोत्सव का समापन होगा।
समापन दिवस पर महाप्रसाद
आयोजन के अंतिम दिन 18 सितंबर को प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक विशेष कथा होगी। इसके बाद दोपहर 1 बजे से महाप्रसाद का आयोजन किया जाएगा।
संजय सर्राफ ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। कथा श्रवण से मनुष्य को आत्मिक शांति प्राप्त होती है तथा परिवार और समाज में संस्कार, सद्भाव और सकारात्मकता मजबूत होती है।
उन्होंने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सपरिवार सातों दिनों कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति और श्रीमद्भागवत के अमृत संदेश का लाभ उठाने का आग्रह किया।
Reviewed by PSA Live News
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8:46:00 pm
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