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मधुबनी में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की कवायद

ऑनलाइन ओपीडी, संस्थागत प्रसव और डिजिटल हेल्थ सेवाओं पर जोर; कमजोर प्रदर्शन वाले चिकित्सकों पर होगी विभागीय कार्रवाई

मधुबनी। जिलाधिकारी आनंद शर्मा के निर्देश के आलोक में अपर समाहर्ता आपदा संतोष कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की वर्चुअल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच तथा डिजिटल हेल्थ सेवाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और पहुंच को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

एएनसी रजिस्ट्रेशन में 102 प्रतिशत उपलब्धि

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में प्रथम तिमाही के दौरान गर्भवती महिलाओं के एएनसी (प्रसवपूर्व जांच) पंजीकरण में 102 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। इस मामले में लौकही, अंधराठाढ़ी और मधेपुर प्रखंड का प्रदर्शन बेहतर रहा। गर्भवती महिलाओं को आयरन एवं कैल्शियम की निर्धारित खुराक उपलब्ध कराने में भी जिले की स्थिति संतोषजनक पाई गई।

6,646 प्रसव, सदर अस्पताल में 159 सिजेरियन

समीक्षा में बताया गया कि जिले के सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 6,646 प्रसव कराए गए। संस्थागत प्रसव के मामले में झंझारपुर और खुटौना का प्रदर्शन सराहनीय रहा। वहीं, सदर अस्पताल मधुबनी में अगस्त माह के दौरान 159 सफल सिजेरियन प्रसव कराए गए।

अपर समाहर्ता ने उन प्रखंडों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया, जहां संस्थागत प्रसव का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।

कुपोषित बच्चों के उपचार में भी बेहतर प्रदर्शन

शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में बताया गया कि अति कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए संचालित एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में झंझारपुर और खुटौना ने निर्धारित लक्ष्य से दोगुना दाखिला कर उल्लेखनीय कार्य किया है। वहीं, सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में अगस्त माह के दौरान 138 नवजात शिशुओं का सफल उपचार किया गया।

ऑनलाइन ओपीडी में 100 प्रतिशत उपलब्धि

बैठक में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 100 प्रतिशत ऑनलाइन ओपीडी परामर्श दर्ज किया गया है। कलुआही, खजौली, मधवापुर, मधेपुर और बेनीपट्टी पीएचसी ने ऑनलाइन ओपीडी परामर्श के निर्धारित लक्ष्य को शत-प्रतिशत बनाए रखा।

त्वरित मरीज पंजीकरण के लिए ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जिले में 76 प्रतिशत ओपीडी परामर्श को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड से जोड़ा गया। इस मामले में सदर अस्पताल मधुबनी ने 98 प्रतिशत उपलब्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।

निःशुल्क दवा वितरण में 104 प्रतिशत उपलब्धि

अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं और जांच सुविधाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि ओपीडी में निःशुल्क दवा वितरण की दर 104 प्रतिशत रही। अनुमंडलीय अस्पताल फूलपरास और राजनगर सीएचसी का प्रदर्शन इस क्षेत्र में बेहतर रहा।

इसके अलावा जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 16,974 पैथोलॉजी जांच की गईं। बैठक में अधिकारियों ने कम जांच वाले स्वास्थ्य संस्थानों की पहचान कर वहां आवश्यक सुधार करने पर जोर दिया।

95 प्रतिशत से कम ऑनलाइन ओपीडी वाले चिकित्सकों पर होगी समीक्षा

समीक्षा के दौरान जिन चिकित्सकों का ऑनलाइन ओपीडी रेशियो 95 प्रतिशत से कम पाया गया, उनके प्रदर्शन की विभागीय समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।

अपर समाहर्ता आपदा संतोष कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन प्रखंडों में संस्थागत प्रसव अथवा पैथोलॉजी जांच का प्रतिशत कम है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से योजनाओं की नियमित निगरानी, आंकड़ों की सही प्रविष्टि और मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, जांच और दवा की उपलब्धता पर निरंतर निगरानी आवश्यक है, ताकि जिले के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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