कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं पर साजिश के आरोप, मिथिला की राजनीति को लेकर संघ के भीतर मंथन तेज
पटना/दरभंगा। राज दरभंगा के प्रति बिहार भाजपा के कथित उपेक्षापूर्ण रवैये को लेकर अब पार्टी के वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के भीतर नाराजगी बढ़ने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, संघ से जुड़े कुछ लोगों में इस बात को लेकर असंतोष है कि मिथिला की राजनीति में राज दरभंगा परिवार की ऐतिहासिक भूमिका और कांग्रेस-विरोधी राजनीतिक विरासत को भाजपा अपेक्षित महत्व नहीं दे रही है।
संघ के अंदर इस मुद्दे पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जिस राज परिवार ने स्वतंत्रता के बाद की राजनीति में पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर कांग्रेस के विभिन्न शीर्ष नेताओं के खिलाफ वैचारिक और राजनीतिक मोर्चा लिया, उसी परिवार के प्रति बिहार भाजपा का वर्तमान रवैया कांग्रेस की राजनीतिक सोच से अलग क्यों नहीं दिखाई दे रहा है?
कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं की भूमिका पर भी सवाल
मामले को लेकर संघ के कुछ कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच कथित तौर पर कांग्रेस से भाजपा में आए कुछ नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि मिथिला में भाजपा की राजनीतिक रणनीति पर ऐसे नेताओं का प्रभाव बढ़ रहा है और इसी वजह से राज दरभंगा को लेकर पार्टी का रुख बदलता नजर आ रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मिथिला की राजनीति में राज दरभंगा का ऐतिहासिक प्रभाव
राज दरभंगा का इतिहास केवल एक राजघराने तक सीमित नहीं रहा है। दरभंगा राज ने शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, धार्मिक संस्थानों और सामाजिक गतिविधियों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। मिथिला की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना में राज परिवार की भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।
इसी वजह से भाजपा के भीतर भी एक वर्ग का मानना है कि मिथिला की राजनीति में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की उपेक्षा पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकती है।
‘नेहरू विरोधी विरासत’ को लेकर संघ में चर्चा
संघ के अंदर उठ रहे सवालों का एक महत्वपूर्ण पहलू राज परिवार की कथित नेहरू-विरोधी राजनीतिक विरासत भी है। संघ से जुड़े लोगों के बीच यह तर्क दिया जा रहा है कि यदि भाजपा स्वयं कांग्रेस की नीतियों और नेहरूवादी राजनीति की आलोचना करती रही है, तो फिर कांग्रेस-विरोधी राजनीतिक इतिहास वाले राज दरभंगा के साथ उसके संबंधों में दूरी क्यों दिखाई दे रही है?
इसी को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या बिहार भाजपा की मौजूदा राजनीतिक रणनीति में मिथिला की पारंपरिक राजनीतिक शक्तियों और प्रतीकों के लिए जगह कम होती जा रही है?
भाजपा की रणनीति पर उठ रहे सवाल
मिथिला क्षेत्र में भाजपा लंबे समय से मजबूत राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश करती रही है। ऐसे में राज दरभंगा जैसे ऐतिहासिक राजनीतिक-सामाजिक प्रतीक को लेकर पार्टी के रवैये पर उठ रहे सवाल आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
संघ के भीतर यह चर्चा भी तेज होने की बात कही जा रही है कि भाजपा की स्थानीय रणनीति और उसके वैचारिक आधार के बीच कहीं कोई अंतर तो पैदा नहीं हो रहा। यदि यह असंतोष बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में संघ के स्तर पर इस विषय को लेकर पार्टी नेतृत्व से संवाद की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब निगाह संघ के अगले कदम पर
फिलहाल पूरा मामला राजनीतिक चर्चाओं और संगठन के अंदर चल रहे कथित मंथन तक सीमित है। भाजपा या संघ की ओर से राज दरभंगा को लेकर किसी आधिकारिक रणनीति अथवा निर्णय की घोषणा नहीं हुई है।
लेकिन जिस तरह राज दरभंगा की उपेक्षा, कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं की भूमिका और मिथिला की राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं, उससे यह मुद्दा बिहार भाजपा के लिए आने वाले दिनों में असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या संघ इस पूरे प्रकरण को केवल आंतरिक चर्चा तक सीमित रखेगा या बिहार भाजपा के रवैये को लेकर कोई स्पष्ट हस्तक्षेप करेगा? आने वाले दिनों में संघ की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी।
Reviewed by PSA Live News
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8:07:00 am
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