सम्पादक - अशोक कुमार झा।
मधुबनी। जिले के पस्टन ग्राम निवासी व मुंगेर के आर डी व डी जे कॉलेज के सेवा निवृत संस्कृत के प्राध्यापक डॉ महेश झा का ७८ वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिछले बुधवार को उन्होंने दिल्ली के एक हॉस्पिटल में इलाज के दौरान अपनी अंतिम साँस लिया। वे पिछले कुछ महीने उनकी तवियत ख़राब चल रही थी, जिस कारण वह स्वस्थ्य लाभ के लिए दिल्ली में इलाजरत थे।
उन्होंने अपनी सरकारी सेवा के दौरान और उसके बाद भी अपने लेखनी को कभी विराम नहीं लगने दिया। इस दौरान उन्होंने संस्कृत के आलावा हिन्दी और मैथिलि भाषाओं में भी अनेक पुस्तकें लिखी। उन्हीं पुस्तकों में उनका एक जिसका शपर्या शतकम था जो सबसे ज्यादा चर्चित रहा।
उन्हें देश के कोने कोने में आयोजित होनेवाले विद्वद सभा में आमंत्रित किया जाता था और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद उन्हें सम्मानित किया जाता था। उन्हें अपनी विद्वता के कारण राष्ट्रपति पुरस्कार सहित कई अन्य पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।
उनका अंतिम संस्कार गंगा नदी के गढ़ मुक्तेश्वर घाट पर किया गया , जहां उनकी चिता को मुखाग्नि उनके बड़े पुत्र मिथिलेश झा ने दिया। वे अपने पीछे दो पुत्र दो पुत्री सहित पूरा भरा पूरा परिवार छोड़ गए है।
उनके आकस्मिक निधन से पूरा झा परिवार के साथ साथ पूरे गांव में शोक व्याप्त है। उनके गांव पस्टन में झा परिवार में सभी बच्चे उनको गुरुदेव बाबा के नाम से जानते थे तथा बयस्क लोग उन्हें झा परिवार का एक अभिभावक मानते थे। झा परिवार के उनके भतीजे श्री श्यामवतार झा का कहना है कि उन्होंने आज अपना एक अभिभावक व पथप्रदर्शक खो दिया जिसकी कमी पूरी नहीं की जा सकती।
संस्कृत के विद्वान व कई पुस्तकों के रचियेता डॉ महेश झा पंच तत्व में विलीन
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9:22:00 am
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