“बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के लिए हाथ से हाथ मिलाकर” थीम पर वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और किसानों का एकजुट संकल्प
रांची, 16 अक्टूबर। विश्व खाद्य दिवस 2025 के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), रांची ने गुरुवार को एक भव्य किसान गोष्ठी एवं अनुसूचित जनजातीय किसानों के लिए इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में राज्यभर से आए लगभग 1000 किसान, महिला कृषक समूह, युवा उद्यमी और वैज्ञानिक शामिल हुए, जिन्होंने मिलकर कृषि नवाचारों और खाद्य सुरक्षा पर विचार साझा किए।
इस वर्ष विश्व खाद्य दिवस की थीम थी — “Hand in Hand for Better Food and a Better Future” (बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के लिए हाथ से हाथ मिलाकर) — जो इस बात पर बल देती है कि जब किसान, वैज्ञानिक और नीति निर्माता एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब ही एक सतत, सुरक्षित और समृद्ध कृषि तंत्र का निर्माण संभव होता है।
मुख्य अतिथि का संबोधन: ‘कृषि और विज्ञान का समन्वय ही आत्मनिर्भर झारखंड की कुंजी’
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि ICAR-IIAB न केवल जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि राज्य के किसानों को नई वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा —
“विश्व खाद्य दिवस की यह थीम हमें यह सिखाती है कि कृषि केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, समाज और नीति के साझा प्रयासों का परिणाम है। बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के लिए हमें साथ मिलकर काम करना होगा।”
मंत्री ने अनुसूचित जनजातीय किसानों के लिए आयोजित विशेष कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन किसानों में आत्मविश्वास, तकनीकी समझ और आधुनिक खेती के प्रति उत्साह बढ़ाते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण, तकनीकी सहयोग और आयवृद्धि के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
सरकारी अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री गोपाल जी तिवारी, संयुक्त सचिव, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार ने कहा कि कृषि और जैव प्रौद्योगिकी का संगम राज्य के किसानों के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। उन्होंने ICAR-IIAB के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित और उनकी टीम के अभिनव प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा —
“कृषि विकास के लिए सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसानों का त्रिकोणीय समन्वय अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
इस अवसर पर डॉ. ए. सिद्दीकी, सचिव, कृषि विभाग तथा डॉ. एस. सी. दुबे, कुलपति, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने भी किसानों को संबोधित किया। डॉ. दुबे ने कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है जब वह किसान के खेत और जीवन में बदलाव लाए। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़े रहें और आर्थिक स्थिरता के लिए फसलों में विविधता लाएँ।
महिला किसानों की सहभागिता: विज्ञान के साथ सशक्त होती खेती
कार्यक्रम में दो महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और ICAR-IIAB द्वारा उपलब्ध कराए गए गुणवत्तापूर्ण बीज, टीकाकरण सहायता और वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रशिक्षण के लिए संस्थान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों ने उनके खेतों की उत्पादकता और आत्मनिर्भरता दोनों में वृद्धि की है।
डॉ. सुजय रक्षित: ‘हर किसान देश की खाद्य सुरक्षा का प्रहरी’
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने कहा —
“प्रत्येक किसान न केवल अन्नदाता है, बल्कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा का प्रहरी भी है। ICAR-IIAB का उद्देश्य किसानों को सशक्त, शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, ताकि वे बदलती जलवायु और बाजार की चुनौतियों का सामना कर सकें।”
उन्होंने बताया कि संस्थान जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के साथ-साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और फील्ड-लेवल नवाचारों को किसानों तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए किसान, वैज्ञानिक और नीति निर्माता एक-दूसरे के पूरक बनकर कार्य करें — यही इस वर्ष की थीम का सार है।
तकनीकी सत्र: खेती में विज्ञान और नवाचार का समन्वय
गोष्ठी के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी, जिनमें शामिल थे:
- रबी फसलों (दलहन एवं तिलहन) की उन्नत तकनीकें
- प्राकृतिक खेती एवं मिट्टी स्वास्थ्य का संरक्षण
- झारखंड में बागवानी की संभावनाएँ
- बतख एवं पोल्ट्री पालन से ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण
- मत्स्य पालन एवं पशुपालन में तकनीकी नवाचार
- राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली
- किसान शिकायत निवारण पोर्टल
- भारत एवं झारखंड की प्रमुख कृषि योजनाएँ
कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जनजातीय किसानों के बीच उन्नत बीज, जैव उर्वरक, पौध सामग्रियाँ, कृषि उपकरण और अन्य इनपुट्स का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम का समापन: धन्यवाद और साझा संकल्प
अंत में डॉ. बिजय पाल भड़ाना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों तथा किसानों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि कृषि आत्मनिर्भरता और खाद्य सुरक्षा की दिशा में “हाथ से हाथ मिलाकर” बढ़ाए गए कदम का प्रतीक है।
विश्व खाद्य दिवस 2025 पर ICAR-IIAB, रांची का यह आयोजन विज्ञान, नीति और समाज के साझा संकल्प का एक जीवंत उदाहरण बना — जहाँ किसान केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवर्तन के साझेदार के रूप में उभरे। यह कार्यक्रम वास्तव में “बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य” की दिशा में झारखंड और पूरे हिंदुस्तान के कृषि जगत के लिए एक नई प्रेरणा बनकर सामने आया।
Reviewed by PSA Live News
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7:34:00 pm
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