ऑड्रे हाउस की कला दीर्घा में उमड़ा कलाकारों और कलाप्रेमियों का जनसैलाब
फोकार्टोपीडिया ने किया अगले वर्ष और भव्य आयोजन का ऐलान
रांची। राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस की कला दीर्घा इस सप्ताह लोक परंपराओं, रंगों और संस्कृति के जीवंत उत्सव की साक्षी बनी। फोकार्टोपीडिया द्वारा आयोजित लोककलाओं की पहली राष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘लोक–2025: लोक परंपराओं का उत्सव’ का समापन समारोह मंगलवार को बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि थीं अपूर्वा जौहरी, जिन्होंने प्रदर्शनी के दौरान आयोजित लोककला कार्यशाला में भाग लेने वाले विभिन्न स्कूलों के बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
लोककला और शिक्षा का संगम
अपूर्वा जौहरी ने अपने संबोधन में कहा कि,
“लोककलाओं को शिक्षा से जोड़ना न केवल आवश्यक है, बल्कि समाज के भावनात्मक और सांस्कृतिक विकास के लिए भी अनिवार्य है। जब तक कलाकारों को रोजगार और मंच नहीं मिलेगा, तब तक कला की नई पीढ़ी आगे नहीं बढ़ सकेगी।”
उन्होंने कहा कि कला बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में सकारात्मक ऊर्जा भरती है। जिस तरह से लोक–2025 में स्कूली बच्चों की भागीदारी देखने को मिली, वह इस बात का संकेत है कि कला की ओर नई पीढ़ी का रुझान बढ़ रहा है।
प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कई राज्यों की कलाकृतियों को देखकर अपूर्वा जौहरी ने कहा —
“एक ही मंच पर इतने विविध लोक रूपों का संगम देखकर यह अहसास होता है कि भारत की आत्मा अब भी अपने लोक में बसती है।”
वरिष्ठ कलाकारों ने जताई खुशी
समापन समारोह में उपस्थित वरिष्ठ कलाकार रामानुज शेखर ने कहा कि,
“झारखंड की धरती पर लोककलाओं की इस तरह की राष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक है। इससे राज्य के कला जगत में आए ठहराव को एक नई गति मिली है।”
वहीं कृष्णा प्रसाद ने कहा कि फोकार्टोपीडिया ने झारखंड को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की कला प्रदर्शनी दी है। विनोद रंजन, वरिष्ठ कलाकार, लेखक और कला शिक्षक ने कहा कि यह आयोजन लोक और समकालीन कला को एक ही छत के नीचे लाने का साहसिक प्रयास है, जिससे संवाद और सृजन की नई राहें खुलेंगी।
बच्चों ने सीखी ‘कला से साक्षात्कार’ की प्रक्रिया
समापन से पूर्व आयोजित कार्यशाला में पचास से अधिक स्कूली छात्र–छात्राओं ने कलाकारों की रचनाओं से साक्षात्कार किया और दीर्घा में बैठकर अपनी अनूठी कलाकृतियाँ तैयार कीं। बच्चों ने पारंपरिक लोकरूपों—मधुबनी, सोहराई, पटचित्र, वर्ली, भील और गोंड—से प्रेरित चित्रों की पुनर्रचना की और उनसे सीखने की कोशिश की।
लोक–2025: संकल्प और संभावनाएँ
समापन अवसर पर सभी कलाकारों और कला शिक्षकों ने यह संकल्प लिया कि ऑड्रे हाउस को कला गतिविधियों का स्थायी केंद्र बनाया जाएगा। कला के व्यावहारिक प्रशिक्षण और रचनात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नियमित कार्यशालाएँ आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।
समारोह में रांची के कई जाने-माने कलाकार और शिक्षाविद उपस्थित रहे —
डॉ. डी.एन. सिंह, हेमलता, दिपांकर कर्मकार, मो. फखरूद्दीन, कृष्णा प्रसाद, हिमाद्री रमाणी सहित अनेक युवा कलाकारों ने आयोजन की सराहना की।
फोकार्टोपीडिया टीम को सराहना
फोकार्टोपीडिया के निदेशक और क्यूरेटर सुनील कुमार ने कहा कि लोक–2025 की सफलता टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा —
“यह आयोजन श्री आसिफ एकराम, निदेशक, संस्कृति, झारखंड सरकार और श्रीमती स्वधा रिजवी, क्षेत्रीय निदेशक, आईसीसीआर, पटना के सहयोग के बिना संभव नहीं था।”
फोकार्टोपीडिया ने इस अवसर पर झारखंड के वरिष्ठ कलाकारों को सम्मानित भी किया। उन्हें अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ प्रदान कर उनके योगदान का आभार व्यक्त किया गया।
अगले वर्ष और भव्य आयोजन का वादा
समापन समारोह के अंत में सुनील कुमार ने घोषणा की कि अगले वर्ष ‘लोक–2026’ और भी बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के साथ विदेशों से भी लोक कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा —
“हमारा उद्देश्य है कि झारखंड न केवल खनिज संपदा के लिए बल्कि अपनी लोकसंस्कृति के लिए भी विश्व मानचित्र पर चमके।”
‘लोक–2025’ ने यह साबित कर दिया कि झारखंड की कला और संस्कृति केवल विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा है — एक ऐसा भविष्य जो लोक की जड़ों से जुड़कर वैश्विक मंच तक पहुंचने का सपना देखता है।
Reviewed by PSA Live News
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