परम कल्याणमयी ‘रमा’ एकादशी: बड़े-बड़े पापों का हरण करने वाली व्रत तिथि, श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठान की तैयारियाँ पूर्ण
रांची। कार्तिक कृष्ण पक्ष की परम पावन एवं कल्याणदायिनी ‘रमा’ एकादशी इस वर्ष शुक्रवार, 17 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस अवसर पर दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं अनेक वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, ब्रह्माण्डनायक भगवान पद्मावती वल्लभ श्रीश्रीनिवास की नित्य आराधना के उपरांत ‘तिरूमंजनानुष्ठान’ का आयोजन होगा। इस अनुष्ठान में भगवान का अभिषेक विभिन्न औषधीय द्रव्यों, सुगंधित पुष्पों एवं पंचामृत से किया जाएगा। श्रद्धालुओं के दर्शन एवं पूजा के लिए सुबह से ही विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं।
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि रमा एकादशी को “उत्तम और बड़े-बड़े पापों को हरने वाली तिथि” कहा गया है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना से न केवल मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है, बल्कि जन्म-जन्मांतर के दोषों का भी नाश होता है।
विशेष बात यह है कि इस बार एकादशी तिथि के साथ प्रदोष काल में द्वादशी का संयोग भी पड़ रहा है, जिसके कारण गोवत्स द्वादशी व्रत भी इसी दिन मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत चिंतामणि और कामधेनु के समान है — जो मनुष्य के सभी मनोरथों को पूर्ण कर समृद्धि प्रदान करता है।
शास्त्रों के अनुसार, उपवासपूर्वक एकादशी का व्रत करने से संपूर्ण फल प्राप्त होता है। फलाहार करने पर आधा फल और केवल जलपान करने पर आंशिक फल की प्राप्ति होती है। वहीं जो भक्त प्रसन्नतापूर्वक अन्न का त्याग कर एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें परम पुण्य फल प्राप्त होता है।
पंडितों के अनुसार —
“जो व्यक्ति एकादशी के दिन प्रसन्न मन से भगवान श्रीमन्नारायण की पूजा, अर्चना, वंदना और मंदिर दर्शन करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। पंद्रह दिनों तक अन्न खाने से जितना पाप होता है, वह सब एकादशी के व्रत मात्र से नष्ट हो जाता है।”
मंदिर परिसर में भक्ति संगीत, श्रीविष्णुसहस्रनाम पाठ एवं सामूहिक आरती का भी आयोजन होगा। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे समय पर पहुँचकर भगवान श्रीश्रीनिवास एवं माता पद्मावती के दर्शन करें और इस पवित्र अवसर पर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।
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7:21:00 pm
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