सहस्त्रनाम अर्चना करके भक्त हुये निहाल , आज संध्या सात बजे अंतिम पाली की अर्चना के बाद अनुष्ठान संपन्न होगा
रांची। दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में धनुर्मास पर्यन्त वैकुण्ठ एकादशी महोत्सव के उपलक्ष्य में चार दिवसीय सहस्त्रनाम अर्चना अनुष्ठान के 31 दिसम्बर को तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं ने बढ़ -चढ़कर सहभागिता निभायी । भगवान् के अलौकिक दर्शन का आनंद और सहस्त्रनाम मंत्रों के मधुर स्वर को सुन भक्त मुग्ध हो रहे थे । आज भी सैंकड़ों भक्तों ने परिवार समूह के साथ सहस्त्रार्चन (लक्षा अर्चना) में भाग लेकर अपने को धन्य माना और भक्तार्तिनाशन भगवान् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की कृपा का अनुभव किया । सबों ने अपने मनोभिलाषित वरों के लिये मंगल प्रार्थना किया ।
जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज भक्तों को संबोधित कर कहा कि आज वर्ष के अंतिम दिवस 31 दिसम्बर की विदायी अपने अंदर की बुराईयों के त्याग के साथ करना है और नये वर्ष का शुभारम्भ भगवान् के मंगल प्रार्थना से करना है ।
हर दिन हमारे लिए नया दिन है। काल बहुत तीव्र गति से निकल रहा है। काल का रूप भगवान का ही रूप है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है - ' मैं ही काल हूं और संसार का नाश मैं ही करता हूं। काल भगवान हमको सावधान करते हैं। काल का अर्थात् समय का सदुपयोग करो । भगवान की सेवा में, आराधना में और भजन में समय लगाओ। किसी से भी बात करो तो यह भाव रखो कि हम भगवान से ही बात कर रहे हैं। बात करते समय किसी तरह का आवेश या उद्वेग नहीं आना चाहिए। धनुर्मास सत्व और गुण युक्त काल है। हम भगवान के हैं , इसीलिए भगवान के कुछ सदगुण हम में भी होने चाहिए। स्वामीजी के साथ श्री गोविंद दास जी महाराज भी उपस्थित थे । मंदिर संचालन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्री राम अवतार नारसरिया आकाश साहू सुशीला कुमारी अर्जुन लांजेकर अमित सरावगी मृत्युंजय सिंह पृथ्वी नाथ सिंह राहुल राम नारसरिया ऋषिकेश मदन सुशील लोहिया आशीष अग्रवाल अनीश अग्रवाल विकास शर्मा सुकुमार सेठी आदि की भूमिका रही ।
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5:01:00 pm
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