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हैप्पी न्यू ईयर नहीं बल्कि हिन्दू सनातन परम्पराओं के अनुसार मनाए नववर्ष


 हरियाणा/ हिसार (राजेश सलूजा) 
।  कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी में कार्यरत सुपरिंटेंडेंट विजय रोहिला ने कहा कि आज के समय में हम बड़े उत्साह से “हैप्पी न्यू ईयर” मनाते हैं, लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि वास्तव में यह नववर्ष है क्या? हमारे शास्त्रों और सनातन परंपराओं के अनुसार नववर्ष केवल तारीख बदलने का नाम नहीं है। नववर्ष वह होता है, जिसके साथ पूजा-पाठ, हवन-यज्ञ, शुभ मुहूर्त, नए कार्यों का आरंभ, व्रत-उपवास, विवाह-संस्कार और ग्रह-नक्षत्रों का अनुकूल योग जुड़ा होता है। परंतु आज जिसे हम नववर्ष कह रहे हैं, उसमें न तो कोई धार्मिक विधि होती है, न कोई संस्कार और न ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन।

वर्तमान नववर्ष की स्थिति यह है कि एक ही रात जागकर युवा वर्ग शराब, मांसाहार, धूम्रपान और अन्य नशों के साथ अश्लीलता का प्रदर्शन करता है। इसे आधुनिकता और आनंद का नाम दिया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि इस प्रकार का उत्सव हमारे स्वास्थ्य, चरित्र और संस्कारों को धीरे-धीरे खोखला कर रहा है। इस नववर्ष से न समाज सुधरता है, न परिवार मजबूत होते हैं और न ही व्यक्ति के जीवन में कोई शुभ परिवर्तन आता है।

सनातन धर्म में नववर्ष का वास्तविक स्वरूप चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से जुड़ा है। यही वह दिन है जब प्रकृति नवजीवन धारण करती है, नवसंवत्सर का आरंभ होता है और हिंदू पंचांग के अनुसार समस्त शुभ कार्य किए जाते हैं। वर्ष 2026 में यह तिथि 19 मार्च को पड़ेगी। यही वह अवसर है जब हम सच्चे अर्थों में नववर्ष मनाने की तैयारी कर सकते हैं—पूजा-पाठ, आत्मशुद्धि, सेवा, संस्कार और सकारात्मक संकल्प के साथ।

अतः सभी से विनम्र अनुरोध है कि हम अपनी सनातन संस्कृति और परंपराओं को समझें, उनका सम्मान करें और पाश्चात्य दिखावे के स्थान पर अपने वास्तविक नववर्ष को अपनाएं। यही हमारी पहचान, हमारी जड़ें और हमारा गौरव है।

हैप्पी न्यू ईयर नहीं बल्कि हिन्दू सनातन परम्पराओं के अनुसार मनाए नववर्ष हैप्पी न्यू ईयर नहीं बल्कि हिन्दू सनातन परम्पराओं के अनुसार मनाए नववर्ष Reviewed by PSA Live News on 9:49:00 pm Rating: 5

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