रांची। 14 जनवरी बुधवार को श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर( तिरुपति बालाजी) मंदिर में माघ कृष्ण षट्तिला एकादशी के उपलक्ष्य पर सुप्रभातम् के बाद दश दिक्पालों का मंत्र पूर्वक दिक्बंधन क्रिया के पश्चात् अखिलाण्ड कोटि ब्रह्माण्डनायक श्रीवेंकटेश्वर के चारो व्यूह -- मूलविग्रह ,उत्सव विग्रह , भोगविग्रह और श्रीपति शालीग्राम भगवान् एवं उनकी प्रेयसियाँ सर्वसहा - श्रीश्रीदेवी , सर्वाभरण भूषिता -श्रीभूमिदेवी , रंगनाथ प्रिया -श्रीगोदांबा देवी , भगवान के आयुधवर चक्र राज सुदर्शन सहित श्रीयंत्र का क्रमानुसार षोडषोपचार पूजा हुआ । नक्षत्र,कुंभ एवं कर्पूर की बाती से महाआरती हुयी ।फिर भगवान् के हृदयाह्लादकारक सुश्राव्य श्रुति,उपनिषद और देशिक स्तोत्राणि के स्तोंत्रों से महास्तुति की गयी । भगवान् रंगनाथ को आज 'वंगकड़ल करैन्दा' अर्थात् समुद्र मंथन नमक पोशाक धारण कराया,औषधि का पान कराया तथा तिरूप्पावै पाशूर , रंगनाथ गद्यम् ,गोदास्टकम, गोदा स्तुति और गोदा प्रपत्ति का अनुसंधान हुआ । आज दिन भर भक्तों का कतार लग रहा सभी अपने अपने कामना अनुसार सहस्त्रनाम , वेंकटेश अष्टोत्तर ,लक्ष्मी अष्टोत्तर से अर्चना एवं सूक्तों का पारायण भी कराया ।अर्थक : श्री सत्यनारायण गौतम श्री गोपेश आचार्य श्री नारायण दास जी ने मिलकर दिनभर के अनुष्ठान को विधिवत् संपन्न कराया । दिनभर का भोग -श्री आशीष अग्रवाल धर्मपत्नी श्रीमती आश्विका अग्रवाल , श्री मनोज तिवारी धर्मपत्नी श्रीमती सुलक्षणा तिवारी एवं एक-एक समय का भोग श्रीमती नीलम जयसवाल और श्री पवन कुमार अग्रवाल की की ओर से निवेदन हुआ ।
षट्तिला एकादशी व्रत पर भगवान् श्रीमन्नारायण का हुआ मंगलाशासनम्
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