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राँची में ब्रह्मा बाबा का स्मृति दिवस: शांति, पवित्रता और आत्मिक चेतना का संदेश


 राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र, चौधरी बगान, हरमू रोड में संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा के स्मृति दिवस (शांति दिवस) के अवसर पर एक भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्मा बाबा के चित्र एवं उनकी स्मृति में स्थापित शांति स्तंभ पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक श्री शिव बालक कुमार ने ब्रह्मा बाबा के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने जितने भी लौकिक कर्म किए, वे सभी अलौकिक कल्याण के लिए थे। उनके कर्मों में न आसक्ति थी, न अहंकार। उन्होंने कभी कर्म त्याग का नहीं, बल्कि कर्म को ईश्वरीय चेतना से जोड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मा बाबा का स्पष्ट संदेश था कि आध्यात्मिक ज्ञान बिना लौकिक कर्तव्यों के अधूरा है और ईश्वरीय ज्ञान में नारी कभी बाधक नहीं होती। उनके अनुसार आध्यात्मिक जीवन में रहने से नर-नारी दोनों में पवित्रता और संतुलन आता है।

वहीं हुंडई मोटर्स के एरिया सेल्स मैनेजर श्री अमरजीत सिंह ने कहा कि जब विश्व स्तर पर सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक और धार्मिक मूल्यों का पतन हो रहा था, तब परमपिता परमात्मा ने ब्रह्मा बाबा को आत्मा के वास्तविक स्वरूप, जन्म-पुनर्जन्म के चक्र और नई सतयुगी दुनिया की स्थापना के दिव्य साक्षात्कार कराए। उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव ने उनके तन का आधार लेकर उनके मुख से निरंतर दिव्य ज्ञान की लहरियाँ प्रवाहित कीं, जिससे स्वयं उनके जीवन में अमूलचूल परिवर्तन आया और वे नई सृष्टि निर्माण के ईश्वरीय माध्यम बने।

दंत चिकित्सक डॉ. रश्मि ने कहा कि जैसे गुड़ रखने से थैली भी मीठी हो जाती है, वैसे ही शिव बाबा की निरंतर याद में रहने से ब्रह्मा बाबा स्वयं भी उन्हीं के समान दिव्य गुणों से भर गए। उनकी त्याग भावना, तपस्या और सेवा की दृढ़ता सभी को नतमस्तक कर देती थी। उनका हाथ सदैव देने की मुद्रा में रहता और वे सांसारिक सुख-सुविधाओं से पूर्णतः निर्लिप्त रहते थे। आज भी उनके तपस्या-प्रधान कक्ष से प्रेरणा की तरंगें प्रस्फुटित होती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि ब्रह्मा बाबा अपने लौकिक जीवन में खिदरपुर के “बादशाह” के रूप में प्रसिद्ध थे। वे धन-वैभव से संपन्न थे, फिर भी धन के दुरुपयोग और अहंकार से पूरी तरह मुक्त थे। पुरुष प्रधान समाज में रहते हुए भी उन्होंने नारी को सर्वोच्च सम्मान और नेतृत्व का अधिकार दिया।

उन्होंने बताया कि सन् 1936-37 में दिव्य साक्षात्कारों के बाद उन्होंने अपना सब कुछ माताओं-बहनों को समर्पित कर दिया और फिर जीवन भर स्वयं धन को हाथ नहीं लगाया। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी उनकी आत्मिक दृष्टि, जो लोगों को देह-अभिमान से ऊपर उठाकर आत्मिक चेतना का अनुभव कराती थी। उनके चेहरे पर दिव्य तेज और भृकुटी में ज्योति का आभास सभी को आकर्षित करता था।

कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से ब्रह्मा बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे दिन योग, ध्यान एवं आत्मिक सशक्तिकरण के विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने ब्रह्मा बाबा के जीवन से प्रेरणा लेकर शांति, पवित्रता और सेवा को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

राँची में ब्रह्मा बाबा का स्मृति दिवस: शांति, पवित्रता और आत्मिक चेतना का संदेश राँची में ब्रह्मा बाबा का स्मृति दिवस: शांति, पवित्रता और आत्मिक चेतना का संदेश Reviewed by PSA Live News on 4:58:00 am Rating: 5

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