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धनुर्मास के पावन अवसर पर वैकुंठोत्सव सहस्त्रनाम अर्चना का भव्य समापन, श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब


रांची। 
धनुर्मास पर्यन्त वैकुंठ एकादशी महोत्सव के अंतर्गत श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में आयोजित वैकुंठोत्सव सहस्त्रनाम अर्चना अनुष्ठान का गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को अत्यंत भक्तिमय और वैदिक विधि-विधान के साथ भव्य समापन हुआ। नववर्ष के पावन अवसर पर मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में भगवान श्री वेंकटेश्वर के विश्वरूप दर्शन से अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात सुप्रभातम्, मंगलाशासनम् एवं तिरुवाराधन संपन्न कर भगवान का महाभिषेक किया गया। दूध, दधि, हल्दी, चंदन, शहद, डाभयुक्त जल, केसरयुक्त जल तथा गंगाजल से मंत्रोच्चार के बीच किए गए अभिषेक ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। महाभिषेक के उपरांत भगवान को रेशमी वस्त्रों से आवृत कर दिव्य आभूषणों से सुसज्जित किया गया। नख से शिखा तक स्वर्ण कवच से आच्छादित भगवान का मूल विग्रह अलौकिक तेज और सौंदर्य से दीप्तमान दिखाई दे रहा था।

नववर्ष की उमंग और सहस्त्रनाम अर्चना के विशेष अनुष्ठान को लेकर श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर का पट पूरे दिन खुला रखा गया और प्रातः से रात्रि तक बिना मध्यांतर के दर्शन एवं पूजा-अर्चना जारी रही।

सहस्त्रनाम अर्चना का शुभारंभ जगतगुरु रामानुजाचार्य परंपरा के पूज्य श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज एवं उनके सहयोगी श्री गोविंद दास जी महाराज के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए जगद्गुरु श्री अनिरुद्धाचार्य जी ने कहा—

“वही शरीर पवित्र है जिससे भगवान की सेवा हो। मनुष्य शरीर और उसकी संपत्ति भगवान की सेवा के लिए ही प्राप्त हुई है। यदि इनका उपयोग ईश्वर आराधना में नहीं होता, तो ऐसा जीवन व्यर्थ है। हम भगवान के हैं और हमारा शरीर, संपत्ति तथा परिवार सभी भगवान के हैं। भगवान की आराधना से समस्त समाज और संबंधों में मधुरता एवं मजबूती आती है।”

उन्होंने गोदाम्बाजी (श्रीमहालक्ष्मी के अवतार) के व्रत का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवत-भागवत के प्रति नम्रता का भाव ही मानव जीवन की सबसे अनमोल पूंजी है।

आज की उद्यास्तमन सेवा के यजमान श्री राजू चौधरी एवं धर्मपत्नी मोना चौधरी रहे। महाभिषेक का सौभाग्य श्री अरुण कुमार सिन्हा एवं धर्मपत्नी अनुराधा सिन्हा को प्राप्त हुआ। दिनभर के भोग का आयोजन स्पर्श आयुष कात्याल द्वारा तथा एक समय के भोग का आयोजन शशांक सोनी की ओर से किया गया।

चार दिनों तक चले इस भव्य अनुष्ठान को अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी ने विधिवत त्रुटि-क्षमा प्रार्थना के साथ संपन्न कराया।

सहस्त्रनाम अर्चना एवं आयोजन की सफलता में मंदिर संचालन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्री राम अवतार नरसरिया सहित श्री अनूप अग्रवाल, श्री अनीश अग्रवाल, गोपाल शर्मा, अनीता रंजन, पंकज अग्रवाल, निरंजन सिंह, आशीष जायसवाल, उत्तम कुमार, कृष्ण बिहारी सिंह, डॉ. अमरनाथ पाठक, रतीश, शिव कुमार द्विवेदी, संजय अग्रवाल, रंजीत कुमार दास, आशीष अग्रवाल, विनय शाही, निखिल रंजन श्रीवास्तव, कुंदन नारायण एवं सुप्रिया अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं और सेवाभावियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।

धनुर्मास, वैकुंठ एकादशी और नववर्ष के संगम पर आयोजित यह वैकुंठोत्सव सहस्त्रनाम अर्चना अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का भी प्रेरक संदेश दे गया।

धनुर्मास के पावन अवसर पर वैकुंठोत्सव सहस्त्रनाम अर्चना का भव्य समापन, श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब धनुर्मास के पावन अवसर पर वैकुंठोत्सव सहस्त्रनाम अर्चना का भव्य समापन, श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब Reviewed by PSA Live News on 12:04:00 pm Rating: 5

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