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धनुर्मास में श्रीगोदा–तिरूप्पावै व्रत : भक्ति, सेवा और मोक्ष की प्राप्ति का दिव्य मार्ग

 


रांची। राँची स्थित दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेङ्कटेश्वर मंदिर में 16 दिसंबर से पवित्र धनुर्मास व्रतोत्सव का शुभारंभ हुआ है। एक माह तक चलने वाले इस उत्सव में प्रतिदिन तिरूप्पावै प्रबंधम् का नित्य अनुसंधान हो रहा है। भगवान को नित्य नवीन दिव्य परिधानों से अलंकृत किया जा रहा है तथा आयुर्वेदिक औषधियों का पान कराकर आरोग्य की कामना की जा रही है।

16 दिसंबर से 14 जनवरी तक पूरे धनुर्मास में श्रीवेङ्कटेश्वर भगवान की पूजा भगवान रंगनाथ के स्वरूप में तथा भूमि देवी लक्ष्मी की पूजा गोदाम्बा देवी के स्वरूप में की जा रही है। मंदिर परिसर में विशेष मंगला आरती, अलंकरण, पुष्पाभिषेक और वेदघोष के बीच श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन हेतु पहुंच रहे हैं। वातावरण “गोविन्दा-गोविन्दा” के पावन उद्घोषों से गूँज रहा है।

धनुर्मास व्रतोत्सव की महिमा श्रीवैष्णव परंपरा में विशेष रूप से प्रतिष्ठित है। पुराणों के अनुसार द्वापर युग में श्रीराधा जी ने गोपिकाओं के साथ कात्यायनी व्रत के रूप में इस अनुष्ठान को संपन्न किया था, जिसका उद्देश्य भगवान प्रियतम का सान्निध्य प्राप्त करना था। कलियुग में लगभग एक हजार वर्ष पूर्व श्रीभूमिदेवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में अवतरित श्रीआण्डाल — जिन्हें गोदा या गोदाम्बा देवी के नाम से जाना जाता है — ने भगवान वटपत्रशायी को पति रूप में पाने की कामना से इसी व्रत का अनुष्ठान किया।

श्रीगोदा देवी ने इस व्रत के तीस दिनों के दौरान प्रतिदिन भगवान के प्रति भक्ति से ओतप्रोत तीस पाशुरों की रचना की, जिन्हें सामूहिक रूप से “तिरूप्पावै” कहा जाता है। इन पाशुरों में वेदों और उपनिषदों के गूढ़तम सिद्धांत सरल भाषा में संजोए गए हैं, जिन्हें वास्तव में “गागर में सागर भरने” का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। श्रीवैष्णव आचार्यों के अनुसार यह व्रत भक्त को भक्ति के साथ-साथ भोग और मोक्ष—दोनों का मार्ग प्रशस्त करता है।

देशभर के सभी दिव्यदेशम् मंदिरों में धनुर्मास के दौरान तिरूप्पावै का नित्य पाठ और विशेष पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। राँची के दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेङ्कटेश्वर मंदिर में भी प्रातःकालीन पूजन के साथ भोग, आरती, वेदपाठ और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस पूरे महीने श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

धार्मिक आस्था से परिपूर्ण यह महोत्सव न केवल भक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश देता है, बल्कि सनातन वैदिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम भी बन रहा है। श्रद्धालु धनुर्मास के इस पावन अवसर पर भगवान से स्वस्थ, समृद्ध और मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं।

धनुर्मास में श्रीगोदा–तिरूप्पावै व्रत : भक्ति, सेवा और मोक्ष की प्राप्ति का दिव्य मार्ग धनुर्मास में श्रीगोदा–तिरूप्पावै व्रत : भक्ति, सेवा और मोक्ष की प्राप्ति का दिव्य मार्ग Reviewed by PSA Live News on 7:41:00 pm Rating: 5

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