अशोक झा :
मेयर पद के लिए कुल 19 उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार किए जा चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने रोशनी खलखो को अपना प्रत्याशी घोषित किया है और उनके समर्थन में केंद्रीय मंत्री तक सड़कों पर उतर चुके हैं। रोशनी खलखो वही नेता हैं जिन्होंने नगर निकाय चुनाव कराने को लेकर न्यायालय में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद करीब दो वर्षों के अंतराल के बाद यह चुनाव संभव हो पाया।
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच संयुक्त उम्मीदवार को लेकर मंथन जारी है, लेकिन जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचने की उम्मीद है।
53 वार्ड, हर वार्ड में कड़ी टक्कर
रांची नगर निगम के कुल 53 वार्डों में पार्षद पद के लिए इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं। इससे साफ है कि वोटों का बंटवारा कई हिस्सों में होगा और जीत के लिए पहले जितने वोटों की जरूरत पड़ती थी, उससे कम में भी कोई प्रत्याशी बाजी मार सकता है। साथ ही जीत का अंतर भी बेहद कम रहने की संभावना है।
वार्ड 34: जहां टकरा रहे हैं दिग्गज
इन्हीं 53 वार्डों में से वार्ड संख्या 34 इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसके पीछे कई वजहें हैं—
आरक्षण रोस्टर में बदलाव के कारण कई दिग्गजों और निवर्तमान पार्षदों को अपने पुराने वार्ड छोड़कर यहां आना पड़ा है। इस वजह से वार्ड 34 कई नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
अरुण कुमार झा
पूर्व में जब यह इलाका वार्ड 37 था, तब अरुण कुमार झा यहां से पार्षद रह चुके हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने व्यवहार और कार्यशैली से लोगों के दिलों में जगह बनाई। बाद में परिसीमन के बाद उन्होंने वार्ड 26 से चुनाव लड़ा, जहां उनके कार्यकाल में विकास कार्यों को लोग आज भी उदाहरण के रूप में देखते हैं।
भले ही वे वार्ड 34 के पार्षद नहीं रहे हों, लेकिन यहां के लोग अपनी समस्याएं लेकर हमेशा उनके पास जाते रहे और उन्होंने कभी यह कहकर मना नहीं किया कि “मैं आपका पार्षद नहीं हूं।” इस बार वार्ड 26 आरक्षित हो जाने के कारण वे फिर से वार्ड 34 से किस्मत आजमा रहे हैं।
ओम प्रकाश
वार्ड 27 के निवर्तमान पार्षद ओम प्रकाश लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं। इस बार उनका वार्ड भी आरक्षित हो गया, इसलिए उन्होंने भी वार्ड 34 से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनके समर्थक उन्हें मजबूत दावेदार मान रहे हैं।
विनोद कुमार सिंह
वार्ड 34 के निवर्तमान पार्षद विनोद कुमार सिंह ने पिछले चुनाव में भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी। उनका प्रभाव आज भी लोगों पर बरकरार है। वे एक बार फिर जनता से भरोसा जताने की अपील कर रहे हैं।
इन तीनों में एक बात कॉमन है—तीनों निवर्तमान पार्षद हैं, मजबूत पकड़ रखते हैं और भाजपा संगठन से जुड़े हैं।
महिला उम्मीदवारों की भी दमदार मौजूदगी
किरण कुमारी: घर-घर टीवी कनेक्शन के व्यवसाय से जुड़ी होने के कारण हर घर तक सीधी पहुंच रखती हैं। पिछले चुनाव में भी उम्मीदवार रह चुकी हैं और इस बार जीत की उम्मीद लेकर उतरी हैं।
सुमन सिंह: भाजपा संगठन से जुड़ी रहते हुए बिना किसी पद पर रहते भी विधायक-सांसद कोटे से कई विकास योजनाएं जमीन पर उतार चुकी हैं। गर्मी में टैंकर से पानी पहुंचाने में भी सक्रिय रही हैं। महिलाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जा रही है।
मंटू सिंह: कृष्णानगर इलाके में प्रभावशाली मानी जाती हैं। रामनवमी जुलूस जैसे आयोजनों में इनके साथ महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखी जाती है।
अन्य चेहरे भी मैदान में
वार्ड 34 में अब तक कुल 24 उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार किए जा चुके हैं। इनमें बबलू सिंह (रक्तदान से जुड़े सामाजिक कार्यों के कारण यमुना नगर में पकड़), नंदलाल सिंह, कमलेश आर्या सहित कई नए चेहरे भी जनता से समर्थन मांग रहे हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर रांची नगर निगम का वार्ड 34 इस बार सिर्फ एक वार्ड नहीं, बल्कि कई दिग्गजों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त और वोटों के संभावित बंटवारे के कारण नतीजा किसके पक्ष में जाएगा, यह कहना अभी मुश्किल है।
आखिरकार फैसला वार्ड 34 की जनता के हाथ में है—वही तय करेगी कि इस बार नेतृत्व किसे सौंपा जाए।
Reviewed by PSA Live News
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4:02:00 pm
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