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करणी सेना के 7वें स्थापना दिवस पर रांची में गूंजा शौर्य: “जय भवानी–जय महाराणा” के नारों से दहली राजधानी

यूजीसी इक्विटी बिल पर तीखे स्वर, संगठन ने कहा—संविधानसम्मत तरीके से रखेंगे पक्ष


रांची।
वीरों और बलिदानियों की धरती रांची ने एक बार फिर राजपुताना शौर्य और संगठन शक्ति का विराट प्रदर्शन देखा। राजधानी के करम टोली चौक स्थित प्रेस क्लब (स्व. हरि नारायण सिंह सभागार) में करणी सेना (पंजीकृत) का 7वां स्थापना दिवस उत्साह, अनुशासन और पारंपरिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। सभागार केसरिया ध्वजों से सुसज्जित था और “जय भवानी! जय महाराणा! भारत माता की जय!” के गगनभेदी जयघोषों से वातावरण गुंजायमान रहा।

राष्ट्रभाव और परंपरा का संगम

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं करणी माता के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सामूहिक गायन ने पूरे आयोजन को राष्ट्रभक्ति के भाव से ओत-प्रोत कर दिया।

सनातन परंपराओं के अनुरूप प्रदेश नेतृत्व द्वारा प्रमुख अतिथियों को अंगवस्त्र और शौर्य-प्रतीक तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित सभी करणी सैनिकों और समाजजनों को केसरिया गमछा ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षत्रिय वीरांगनाएं पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित रहीं, जिससे आयोजन की गरिमा और भव्यता और बढ़ गई।

संगठन की मर्यादा और अनुशासन ही पहचान”—प्रदेश अध्यक्ष

प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर प्रवीण सिंह ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि राजपूत समाज ने इतिहास के हर दौर में राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा,

“हम सामाजिक समरसता के पक्षधर हैं, किंतु किसी भी प्रकार के अन्याय और भेदभाव को स्वीकार नहीं करेंगे। समाज की एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। संगठन की मर्यादा और अनुशासन ही हमारी पहचान है।”

उन्होंने नई पीढ़ी को शिक्षा, संगठन और सेवा के माध्यम से सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया और समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

स्वाभिमान की आवाज है संगठन”—राष्ट्रीय मंत्री

राष्ट्रीय मंत्री अमन सिंह ने कहा कि करणी सेना केवल एक संगठन नहीं, बल्कि स्वाभिमान और अधिकारों की आवाज है।

“जब भी समाज के अधिकारों पर प्रहार होगा, हम लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उसका प्रतिकार करेंगे। राष्ट्रहित और समाजहित हमारे लिए सर्वोपरि है।”

उन्होंने समाज से संयमित, सकारात्मक और संगठित रहने का संदेश दिया।

यूजीसी इक्विटी बिल पर प्रखर प्रतिक्रिया

प्रदेश महामंत्री सह मीडिया प्रभारी डॉ. धीरज सिंह “सूर्यवंशी” उर्फ बिनु सिंह ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में यूजीसी इक्विटी बिल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधान समाज में जातीय विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं और सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी कर सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन संविधानसम्मत और लोकतांत्रिक दायरे में रहते हुए अपना विरोध दर्ज कराएगा और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए वैचारिक व कानूनी स्तर पर संघर्ष करेगा।

इतिहास साक्षी है—जब-जब स्वाभिमान पर चोट हुई”

प्रदेश संगठन महामंत्री हरि सिंह ने कहा कि आज समय की मांग है कि समाज संगठित होकर भावी पीढ़ी के अधिकारों की रक्षा करे।

“जब-जब स्वाभिमान पर चोट हुई है, क्षत्रिय समाज ने इतिहास रचा है। संगठन की शक्ति ही हमारी असली पहचान है।”

उल्लेखनीय उपस्थिति और प्रीतिभोज

समारोह में प्रवीण सिंह, अमन सिंह, डॉ. धीरज सिंह “सूर्यवंशी” (बिनु सिंह), हरि सिंह, स्वामी जी, विजय सिंह, जय श्रीवास्तव, अमरेंद्र सिंह, सूरज सिंह, विकास वर्मा, स्वाति सिंह, गिरिजा शंकर, गोपाल सिंह, विक्रम सिंह, सुशील सिंह, निर्भय सिंह, बबिता सिंह, विजेता सिंह, पी.के. सिंह, दीपक सिंह, श्याम किशोर सिंह, संतोष सिंह, नीरज सिंह, मुन्ना सिंह, अभिनाश सिंह, आलोक सिंह, रवि सिंह, आराधना सिंह, समर्पना सिंह, प्रियंका राजपूत, श्वेता सिंह, प्रमोद सिंह एवं संजय शर्मा सहित हजारों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

समापन अवसर पर प्रदेश नेतृत्व के सौजन्य से सभी आगंतुकों के लिए सुरुचिपूर्ण प्रीतिभोज की व्यवस्था की गई।

रांची की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित यह स्थापना दिवस समारोह केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं रहा, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक चेतना के प्रदर्शन के रूप में उभरकर सामने आया। केसरिया ध्वज की छत्रछाया में गूंजते जयघोषों ने स्पष्ट संकेत दिया कि संगठन अपने मूल्यों, अधिकारों और सामाजिक पहचान को लेकर सजग, संगठित और सक्रिय है।

करणी सेना के 7वें स्थापना दिवस पर रांची में गूंजा शौर्य: “जय भवानी–जय महाराणा” के नारों से दहली राजधानी करणी सेना के 7वें स्थापना दिवस पर रांची में गूंजा शौर्य: “जय भवानी–जय महाराणा” के नारों से दहली राजधानी Reviewed by PSA Live News on 7:12:00 pm Rating: 5

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