राँची। दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में शनिवार, 21 फरवरी को 919वें खिचड़ी भंडारे का भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में आयोजन किया गया। प्रातःकालीन बेला में चतुर्दश भुवनों के धारक, श्रीपद्मावती वल्लभ भगवान् के श्रीचरणों में विधिवत वंदन एवं तिरूवाराधनम् संपन्न हुआ। तत्पश्चात महाआरती के साथ पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण गूंज उठा।
इस अवसर पर भक्तवत्सल, चतुर्व्यूह विभूतिस्वरूप श्रियःपति श्रीमन्नारायण को संजीवनी औषधि स्वरूप सात प्रकार के अन्न और सात प्रकार की सब्जियों के समन्वय से निर्मित सुपक्व खिचड़ी महाप्रसाद का भोग अर्पित किया गया। वैदिक शास्त्रों में अन्न को प्राणियों का प्राण, ओज, बल और सुख का आधार बताया गया है। इसी मान्यता के अनुरूप भगवान को अन्न से निर्मित महाप्रसाद अर्पित करने की परंपरा का निर्वहन किया गया।
भोग अर्पण के पश्चात खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें कुल 1473 श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य माना। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन व व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।
आज के खिचड़ी महाप्रसाद का निवेदन राँची निवासी श्री सुशील गाड़ोदिया एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सरिता गाड़ोदिया की ओर से किया गया। उन्होंने इसे अपने परिवार की आध्यात्मिक सेवा बताते हुए नियमित रूप से ऐसे आयोजनों में सहभागिता का संकल्प व्यक्त किया।
अनुष्ठान एवं भोग अर्पण की संपूर्ण प्रक्रिया अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी के मार्गदर्शन में शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार संपन्न हुई। प्रसाद की तैयारी से लेकर वितरण तक की व्यवस्था में मंदिर समिति एवं स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आयोजन को सफल बनाने में सर्वश्री राम अवतार नरसरिया, प्रदीप नरसरिया, राजेश सुलतानिया, गौरीशंकर साबू, रंजन सिंह, शम्भुनाथ पोद्दार, प्रभाष मित्तल, सीता शर्मा, यशोदा देवी, छाया दुबे सहित अनेक श्रद्धालुओं का सराहनीय योगदान रहा।
919वें खिचड़ी भंडारे ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब आस्था, सेवा और समर्पण का संगम होता है, तब धार्मिक आयोजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आध्यात्मिक उन्नयन का माध्यम बन जाते हैं।
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6:19:00 pm
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