राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र, चौधरी बगान (हरमू रोड) में आयोजित प्रवचन में ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि योग के बिना सुख का सार नहीं है। उन्होंने जीवन की तुलना मरुस्थल में बने रेत के ढेर से की और कहा कि जब तक मनुष्य योगी नहीं बनता, तब तक उसका जीवन रोग, शोक, तनाव और अशांति की दरारों से भरा रहता है।
निर्मला बहन ने श्रीमद्भगवद्गीता के महावाक्यों का उल्लेख करते हुए कहा—
“सृष्टि के आदिकाल में भगवान ने योग की शिक्षा दी थी, जो कालांतर में लुप्त हो गई। अब पुनः मानव कल्याण के लिए परमात्मा ने साधारण मानवी तन का आधार लेकर उसी प्राचीन ईश्वरीय राजयोग की शिक्षा देना आरंभ किया है।”
उन्होंने कहा कि देहाभिमान के कारण बहुत से लोग अव्यक्त और अविनाशी परमात्मा को पहचान नहीं पाते, जबकि आज के समय में यही पहचान मनुष्य को आत्मिक शक्ति और शांति प्रदान कर सकती है।
उन्होंने वर्तमान सामाजिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज समाज में भ्रष्टाचार, अनाचार और मनोविकार तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में राजयोग ही वह माध्यम है, जो व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है और जीवन को सच्चे, स्थायी सुख की दिशा में ले जाता है।
“योग के बिना मनुष्य का जीवन सुख-सार से रहित मरुस्थल जैसा है। यदि हमें अपने जीवन और समाज को सुदृढ़ बनाना है, तो योगी और पवित्र बनना होगा,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम के अंत में निर्मला बहन ने सभी को राजयोग सीखने के लिए आमंत्रित करते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारी केंद्र, चौधरी बगान, हरमू रोड में प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 10:00 बजे तक और संध्या 3:00 बजे से 7:00 बजे तक निःशुल्क राजयोग प्रशिक्षण दिया जाता है। इच्छुक लोग आकर आत्मिक शांति और जीवन में स्थायित्व का अनुभव कर सकते हैं।
Reviewed by PSA Live News
on
12:28:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: